सात महीने से वेतन न मिलने पर सफाई कर्मचारियों ने किया था प्रदर्शन
पश्चिमी दिल्ली, 7 जुलाई
निगम उपायुक्त कार्यालय के बाहर वेतन की मांग को लेकर प्रदर्शन करने पर गिरफ्तार सभी 14 सफाईकर्मियों को महानगर दंडाधिकारी ने जमानत दे दी। वहीं प्रदर्शन 0में घायल पुलिस और आम जनता की मेडिकल रिपोर्ट में भी सामान्य चोटें आई हैं।
गौरतलब है कि 3 जून को 7 माह से वेतन न मिलने पर नजफगढ़ स्थित उपायुक्त कार्यालय के बाहर सफाईकर्मियों ने जम कर बवाल मचाया था। इस दौरान लो फ्लोर बस और पुलिस जिप्सी में भी आग लगा दी गई थी। साथ ही सफाईकर्मियों द्वारा किए गए पथराव में कई पुलिसकर्मी और आम लोग घायल हुए थे। इस पर पुलिस ने दंगा करने, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, जान से मारने समेत कई धाराओं में मामला दर्ज किया था। साथ ही दस पुरुष और चार महिला सफाईकर्मियों को गिरफ्तार कर द्वारका कोर्ट में पेश किया था। एक दिन न्यायिक हिरासत में रखने के बाद महानगर दंडाधिकारी ने चार महिलाओं को अंतरिम जमानत दे दी थी, जबकि पुरुष सफाईकर्मी न्यायिक हिरासत में चल रहे थे।
सोमवार को जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए महानगर दंडाधिकारी एन के लाका ने सभी चौदह सफाईकर्मियों को जमानत दे दी। सफाईकर्मियों की ओर से पेश वकील अवनीश राणा और वाईपी सिरोही ने बताया कि घायल पुलिसकर्मियों और जनता की मेडिकल रिपोर्ट न आने के चलते जमानत पर सुनवाई नहीं हो पा रही थी। बुधवार को मेडिकल रिपोर्ट महानगर दंडाधिकारी के समझ पेश कर दी गई। रिपोर्ट में सभी घायलों की चोटें सामान्य बताई गई हैं, जिसके चलते महानगर दंडाधिकारी ने सभी को जमानत दे दी है। वकील राणा ने आरोप लगाया कि सफाई कर्मियों को फंसाने के लिए पुलिस पर हमला दिखाया गया था।
बाल श्रम,आत्महत्याएं,औद्योगिक दुर्घटनाएं
23 मार्च
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यूनियन
रिफाइनरी
श्रम
श्रम कानून
सज़ा
सिंगापुर
सेज
हड़ताल
Wednesday, July 7, 2010
रेलवे स्टेशन भगदड़ मामले में एनएचआरसी ने रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष को दिया नोटिस
नई दिल्ली, 7 जुलाई
मई महीने में नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर हुए भगदड़ मामले का संज्ञान लेते हुए मानवाधिकार आयोग ने रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष और उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक को नोटिस जारी करते हुए उनसे रिपोर्ट देने को कहा है। आयोग ने इन्हें चार हफ्तों का समय देते हुए इनसे पीडि़त परिवार के लोगों को दिए मुआवजा संबंधी जानकारी मांगी है। उल्लेखनीय है कि बिहार और उत्तर प्रदेश के प्रवासी मजदूरों के गर्मी में घर वापसी के कारण भीड़ बढ़ गई थी जिसके कारण भगदड़ मच गई। अक्सर ही गर्मी में उत्तर प्रदेश और बिहार में शादियां होती हैं क्योंकि किसान गेहूं की फसल काट चुके होते हैं। ऐसे में मजदूरी कर रहे एनसीआर की एक बड़ी आबादी अपने घरों को रवाना होती है।
आयोग ने इस मामले का संज्ञान मानवाधिकार कार्यकर्ता और वकील प्रबीर कुमार दास के द्वारा दायर की गई एक शिकायत याचिका पर लिया है। दास ने अपनी शिकायत में यह आरोप लगाया है कि रेलवे के अधिकारियों की लापरवाही के कारण यह दुर्घटना हुई। दास ने इस मामले में आयोग से हस्तक्षेप कर जांच करने और जांच में दोषी पाए गए लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।
गौरतलब है कि 16 मई को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर टे्रनों के प्लेटफार्म में अंतिम समय पर अदला-बदली करने से हुई इस दुर्घटना में दो यात्रियों की मौत हो गई थी और आठ अन्य घायल हो गए थे।
मई महीने में नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर हुए भगदड़ मामले का संज्ञान लेते हुए मानवाधिकार आयोग ने रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष और उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक को नोटिस जारी करते हुए उनसे रिपोर्ट देने को कहा है। आयोग ने इन्हें चार हफ्तों का समय देते हुए इनसे पीडि़त परिवार के लोगों को दिए मुआवजा संबंधी जानकारी मांगी है। उल्लेखनीय है कि बिहार और उत्तर प्रदेश के प्रवासी मजदूरों के गर्मी में घर वापसी के कारण भीड़ बढ़ गई थी जिसके कारण भगदड़ मच गई। अक्सर ही गर्मी में उत्तर प्रदेश और बिहार में शादियां होती हैं क्योंकि किसान गेहूं की फसल काट चुके होते हैं। ऐसे में मजदूरी कर रहे एनसीआर की एक बड़ी आबादी अपने घरों को रवाना होती है।
आयोग ने इस मामले का संज्ञान मानवाधिकार कार्यकर्ता और वकील प्रबीर कुमार दास के द्वारा दायर की गई एक शिकायत याचिका पर लिया है। दास ने अपनी शिकायत में यह आरोप लगाया है कि रेलवे के अधिकारियों की लापरवाही के कारण यह दुर्घटना हुई। दास ने इस मामले में आयोग से हस्तक्षेप कर जांच करने और जांच में दोषी पाए गए लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।
गौरतलब है कि 16 मई को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर टे्रनों के प्लेटफार्म में अंतिम समय पर अदला-बदली करने से हुई इस दुर्घटना में दो यात्रियों की मौत हो गई थी और आठ अन्य घायल हो गए थे।
यहां नौकरानी को दासी बनाने वाले बेदाग छूट जाते हैं
नौकरानी को दास बनाने वाले वरिष्ठ राजनयिक को क्लीन चिट
नई दिल्ली, 7 जुलाई
यह भारत देश है। यहां नौकरानियों से बलात्कार, मारपीट और उत्पीड़न की घटना में बेदाग छूटना लक्जरी है। अपनी नौकरानी को दासी बनाने वाले एक वरिष्ठ राजनयिक को सरकार ने बुधवार को वस्तुत: क्लीन चिट दे दी। वह अमेरिकी अदालत में अपनी नौकरानी को दास बनाने के आरोपों का सामना कर रही है। विदेश मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि अपनी पूर्व नियोक्ता नीना मल्होत्रा के खिलाफ मुकदमा दायर करने वाली नौकरानी शांति गुरुंग उनके भारत लौटने के एक दिन पहले राजनयिक के न्यूयार्क स्थित घर से गायब हो गई थी।
विदेश मंत्रालय में निदेशक (दक्षिण) के पद पर फिलहाल कार्यरत मल्होत्रा ने गुरुंग को नौकरानी के तौर पर उस समय रखा था, जब वह साल 2006 में न्यूयार्क स्थित वाणिज्यिक दूतावास में पदस्थापित थीं।
सूत्रों ने बताया कि 19 वर्षीय गुरुंग ने मल्होत्रा के घर नौकरानी के तौर पर काम करने के लिए सहमति देने के बाद वीजा के लिए यहां स्थित अमेरिकी दूतावास गई थी।
उन्होंने बताया कि रोजगार की शर्तों पर सहमति बनी थी और गुरुंग को प्रत्येक माह 5000 रुपया दिया जाना था। मल्होत्रा एक साल के लिए न्यूयार्क में थीं और बाद में उनके पति वहां पहुंचे।
विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार चूंकि राजनयिक सुबह से लेकर शाम तक काम पर रहती थी इसलिए नौकरानी पर घर छोड़ दिया जाता था। उन्होंने कहा कि गुरुंग ने भारत की यात्रा भी की थी और अपने परिवार के साथ ठहरी भी थी। इसका खर्च मल्होत्रा ने वहन किया था।
नई दिल्ली, 7 जुलाई
यह भारत देश है। यहां नौकरानियों से बलात्कार, मारपीट और उत्पीड़न की घटना में बेदाग छूटना लक्जरी है। अपनी नौकरानी को दासी बनाने वाले एक वरिष्ठ राजनयिक को सरकार ने बुधवार को वस्तुत: क्लीन चिट दे दी। वह अमेरिकी अदालत में अपनी नौकरानी को दास बनाने के आरोपों का सामना कर रही है। विदेश मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि अपनी पूर्व नियोक्ता नीना मल्होत्रा के खिलाफ मुकदमा दायर करने वाली नौकरानी शांति गुरुंग उनके भारत लौटने के एक दिन पहले राजनयिक के न्यूयार्क स्थित घर से गायब हो गई थी।
विदेश मंत्रालय में निदेशक (दक्षिण) के पद पर फिलहाल कार्यरत मल्होत्रा ने गुरुंग को नौकरानी के तौर पर उस समय रखा था, जब वह साल 2006 में न्यूयार्क स्थित वाणिज्यिक दूतावास में पदस्थापित थीं।
सूत्रों ने बताया कि 19 वर्षीय गुरुंग ने मल्होत्रा के घर नौकरानी के तौर पर काम करने के लिए सहमति देने के बाद वीजा के लिए यहां स्थित अमेरिकी दूतावास गई थी।
उन्होंने बताया कि रोजगार की शर्तों पर सहमति बनी थी और गुरुंग को प्रत्येक माह 5000 रुपया दिया जाना था। मल्होत्रा एक साल के लिए न्यूयार्क में थीं और बाद में उनके पति वहां पहुंचे।
विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार चूंकि राजनयिक सुबह से लेकर शाम तक काम पर रहती थी इसलिए नौकरानी पर घर छोड़ दिया जाता था। उन्होंने कहा कि गुरुंग ने भारत की यात्रा भी की थी और अपने परिवार के साथ ठहरी भी थी। इसका खर्च मल्होत्रा ने वहन किया था।
नोएडा में बगावत पर उतरे विद्युत कर्मचारी
हड़ताल पर रोक के शासनादेश को किया दरकिनार
-22 व 23 जुलाई को करेंगे प्रदेशव्यापी हड़ताल
-केस्को को निजी हाथों में सौंपे जाने का विरोध करेंगे नोएडा की विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति
नोएडा, 7 जुलाई : बिजली कर्मचारी बगावत पर उतर आए हैं। शासन के निर्णय के विरोध में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने झंडा बुलंद कर दिया है। ऊर्जा निगमों के कर्मचारी व अभियंता कानपुर विद्युत आपूर्ति कंपनी (केस्को) को निजी एजेंसी टोरेंट पावर कंपनी को सौंपे जाने का विरोध कर रहे हैं। संघर्ष समिति ने हड़ताल पर रोक के शासनादेश को भी दरकिनार कर दिया है। विद्युत कर्मचारी 22 व 23 जुलाई को प्रदेशव्यापी हड़ताल करेंगे।
संघर्ष समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने बताया कानपुर के बाद नोएडा को निजी हाथों में सौंपे जाने की सुगबुगाहट तेज हो गई है। शासन स्तर पर फायदे में चल रहे सभी मंडल को निजी कंपनी के हाथों में सौंपने का षडयंत्र रचा जा रहा है। बिजली क्षेत्र में सुधार ही करना है तो मऊ, गाजीपुर व आजमगढ़ मंडल को निजी कंपनी को सौंपा जाए।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने बुधवार को नोएडा में इसकी घोषणा की। दुबे ने कहा कि उत्पादन, पारेषण व वितरण सभी क्षेत्र के कर्मचारी गांधीवादी तरीके से हड़ताल करेंगे। कार्य बहिष्कार कर प्रदेश के मुख्य व अधीक्षण अभियंता कार्यालय पर धरना दिया जाएगा। विद्युत निगम को प्रति यूनिट बिजली की उत्पादन लागत पांच रुपये पैंतीस पैसे पड़ रही है, जबकि आगरा में निजी कंपनी को एक रुपये 54 पैसे की दर से बिजली दी जा रही है। उन्होंने सवाल किया कि करोड़ों रुपये का घाटा उठाने के बावजूद कंपनी पर यह मेहरबानी क्यों? प्रदेश में बिजली की किल्लत होने पर केंद्रीय ग्रिड से 17 रुपये 46 पैसे प्रति यूनिट की दर से बिजली खरीदनी पड़ रही है। ऐसे में कंपनी को कौडिय़ों के भाव बिजली बेचना तर्कसंगत नहीं है। आगरा में दो हजार मिलियन यूनिट बिजली आपूर्ति हर साल की जाती है। कम दरों पर बिजली देने से निगम को सात सौ करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है। शासन राजस्व वसूली में कमी आने पर केस्को को निजी हाथों में सौंपने का हवाला दे रहा है। जबकि कानुपर बिजली आपूर्ति कंपनी ने सबसे अधिक साढ़े सत्रह फीसदी राजस्व वृद्धि दर्ज की है। निजी कंपनी के पीछे भागने का कारण जनता के पैसे को हड़पना है।
उन्होंने कहा कि कानुपर में डंकन फर्टिलाइजर्स कंपनी तीन साल से बंद पड़ी हुई थी। जेपी इसे खरीदकर जनवरी 2011 से शुरू करने जा रहा है। चार करोड़ यूनिट बिजली की कंपनी में हर महीने खपत है। इससे बीस करोड़ रुपये निगम को राजस्व के रूप में प्राप्त होते हैं। केस्को के निजी हाथों में चले जाने से निगम को मात्र आठ करोड़ रुपये मिलेंगे, जबकि 12 करोड़ रुपये कंपनी के खाते में जाएंगे। इसे देखते हुए ही संघर्ष समिति ने प्रदेश व्यापी आंदोलन शुरू करने का निर्णय लिया है। हड़ताल के बावजूद केस्को को निजी हाथों में सौंपने का निर्णय निरस्त नहीं किया गया, तो 24 जुलाई को कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे।
-22 व 23 जुलाई को करेंगे प्रदेशव्यापी हड़ताल
-केस्को को निजी हाथों में सौंपे जाने का विरोध करेंगे नोएडा की विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति
नोएडा, 7 जुलाई : बिजली कर्मचारी बगावत पर उतर आए हैं। शासन के निर्णय के विरोध में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने झंडा बुलंद कर दिया है। ऊर्जा निगमों के कर्मचारी व अभियंता कानपुर विद्युत आपूर्ति कंपनी (केस्को) को निजी एजेंसी टोरेंट पावर कंपनी को सौंपे जाने का विरोध कर रहे हैं। संघर्ष समिति ने हड़ताल पर रोक के शासनादेश को भी दरकिनार कर दिया है। विद्युत कर्मचारी 22 व 23 जुलाई को प्रदेशव्यापी हड़ताल करेंगे।
संघर्ष समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने बताया कानपुर के बाद नोएडा को निजी हाथों में सौंपे जाने की सुगबुगाहट तेज हो गई है। शासन स्तर पर फायदे में चल रहे सभी मंडल को निजी कंपनी के हाथों में सौंपने का षडयंत्र रचा जा रहा है। बिजली क्षेत्र में सुधार ही करना है तो मऊ, गाजीपुर व आजमगढ़ मंडल को निजी कंपनी को सौंपा जाए।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने बुधवार को नोएडा में इसकी घोषणा की। दुबे ने कहा कि उत्पादन, पारेषण व वितरण सभी क्षेत्र के कर्मचारी गांधीवादी तरीके से हड़ताल करेंगे। कार्य बहिष्कार कर प्रदेश के मुख्य व अधीक्षण अभियंता कार्यालय पर धरना दिया जाएगा। विद्युत निगम को प्रति यूनिट बिजली की उत्पादन लागत पांच रुपये पैंतीस पैसे पड़ रही है, जबकि आगरा में निजी कंपनी को एक रुपये 54 पैसे की दर से बिजली दी जा रही है। उन्होंने सवाल किया कि करोड़ों रुपये का घाटा उठाने के बावजूद कंपनी पर यह मेहरबानी क्यों? प्रदेश में बिजली की किल्लत होने पर केंद्रीय ग्रिड से 17 रुपये 46 पैसे प्रति यूनिट की दर से बिजली खरीदनी पड़ रही है। ऐसे में कंपनी को कौडिय़ों के भाव बिजली बेचना तर्कसंगत नहीं है। आगरा में दो हजार मिलियन यूनिट बिजली आपूर्ति हर साल की जाती है। कम दरों पर बिजली देने से निगम को सात सौ करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है। शासन राजस्व वसूली में कमी आने पर केस्को को निजी हाथों में सौंपने का हवाला दे रहा है। जबकि कानुपर बिजली आपूर्ति कंपनी ने सबसे अधिक साढ़े सत्रह फीसदी राजस्व वृद्धि दर्ज की है। निजी कंपनी के पीछे भागने का कारण जनता के पैसे को हड़पना है।
उन्होंने कहा कि कानुपर में डंकन फर्टिलाइजर्स कंपनी तीन साल से बंद पड़ी हुई थी। जेपी इसे खरीदकर जनवरी 2011 से शुरू करने जा रहा है। चार करोड़ यूनिट बिजली की कंपनी में हर महीने खपत है। इससे बीस करोड़ रुपये निगम को राजस्व के रूप में प्राप्त होते हैं। केस्को के निजी हाथों में चले जाने से निगम को मात्र आठ करोड़ रुपये मिलेंगे, जबकि 12 करोड़ रुपये कंपनी के खाते में जाएंगे। इसे देखते हुए ही संघर्ष समिति ने प्रदेश व्यापी आंदोलन शुरू करने का निर्णय लिया है। हड़ताल के बावजूद केस्को को निजी हाथों में सौंपने का निर्णय निरस्त नहीं किया गया, तो 24 जुलाई को कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे।
Monday, July 5, 2010
वेतन न मिलने पर एमसीडी के सफाई कर्मचारियों ने की हड़ताल
नई दिल्ली, 5 जुलाई
राजधानी के अनेक इलाकों में दिल्ली नगर निगम के सफाई कर्मचारी निगम द्वारा कथित तौर पर वेतन नहीं दिए जाने के खिलाफ काम नहीं कर रहे हैं। अधिकारियों ने कहा कि निगम के नजफगढ़, करोलबाग, शाहदरा उत्तर और दक्षिण, दक्षिण और मध्य दिल्ली जोन के कर्मचारी सप्ताहांत में काम पर नहीं आए।
आंदोलन को गैरकानूनी ठहराते हुए एमसीडी ने चेतावनी दी है कि सोमवार से काम के बजाय धरना-प्रदर्शन करने वाले सफाई कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
सफाई कर्मचारियों का एक सप्ताह से चल रहा आंदोलन एमसीडी को भारी पड़ रहा है। आयुक्त केएस मेहरा ने कर्मचारी नेताओं के साथ बैठक में उनकी अधिकतर मांगें ली थीं। स्थायी समिति अध्यक्ष योगेंद्र चंदोलिया भी सार्वजनिक तौर पर सफाई कर्मियों की मांगें मानने की घोषणा कर चुके हैं। इसके बावजूद आंदोलन खत्म होने के बजाय तेज हो गया है। एमसीडी प्रवक्ता दीप माथुर का कहना है कि प्रशासन ने आंदोलनकारी सफाई कर्मियों के प्रति अब कोई नरमी नहीं बरतने का फैसला किया है। उन्हें हर हाल में काम करना होगा। ऐसा नहीं करने पर विभागीय कार्रवाई होगी।
उधर, कर्मचारियों के आंदोलन के चलते एमसीडी का 1 जुलाई से शुरू हुआ विशेष सफाई अभियान टांय-टांय फिस्स है। आंदोलनकारियों ने जगह-जगह कूड़ा डालकर सफाई व्यवस्था चौपट कर दी है। शनिवार को तो उन्होंने उस कालोनी में उन्होंने प्रदर्शन किया, जिसमें मेयर पृथ्वीराज साहनी रहते हैं। उनकी कालोनी के चारों ओर सड़कों पर कर्मचारियों ने कूड़ा फैला दिया।
निगम ने कहा कि दैनिक वेतन वाले कर्मचारियों का पंजीकरण अभी उपस्थिति की बायोमेट्रिक प्रणाली में नहीं है और कुछ को इसके इस्तेमाल में तकनीकी कठिनाइयां आ रहीं हैं।
हड़ताली कर्मचारी चाहते हैं कि निगम में हाजिरी के लिए इस तरह की तकनीकी प्रणाली का इस्तेमाल नहीं किया जाए लेकिन एमसीडी इस मांग पर विचार नहीं कर रहा।
एमसीडी की स्थाई समिति के अध्यक्ष योगेंद्र चंडोलिया ने कहा कि सफाई कर्मचारी अनेक मुद्दों पर पिछले कुछ महीनों से हड़ताल कर रहे हैं। नियमितीकरण की उनकी मांग जायज है और इस पर विचार किया गया है, लेकिन उन्हें बायोमेट्रिक प्रणाली से हाजिरी लगानी चाहिए। हम किसी तकनीकी समस्या पर विचार करेंगे लेकिन इस प्रणाली को नहीं अपनाने का सवाल ही नहीं है।
सफाई कर्मियों को समय पर नहीं मिलता वेतन
गोहाना, 20 जून नगरपालिका के ठेके पर लगे सफाई कर्मचारियों को पिछले तीन माह से वेतन न मिलने के कारण उनमें रोष पनप रहा है। समय पर वेतन का भुगतान न होने के कारण सफाई कर्मचारियों की आजीविका भी प्रभावित हो रही है। कर्मचारियों ने बुधवार को एसडीएम से मुलाकात कर उनको हर माह समय पर वेतन का भुगतान करवाने की मांग की।
ठेके पर लगे सफाई कर्मचारी राजे, जितेंद्र, गौतम, विकास, देशराम, राजू, सतबीर, रिंकू, अनु, सीमा, अनीता, कविता, विजय, नीरू, सुनीता, रानी, राजेश आदि वेतन समस्या को लेकर बुधवार को एसडीएम से मिलने पहुंचे। मौके पर मौजूद सफाई कर्मचारियों ने कहा कि उनको तीन माह से वेतन नहीं मिल है। वेतन न मिलने के कारण उनके घर का खर्च चलना मुश्किल हो गया है। उनका परिवार भुखमरी की कगार पर पहुंच चुके हैं। उनके बच्चों की पढ़ाई की फीस भी नहीं दी जा रही है, जिसकी वजह से उनके बच्चे में परेशानी में हैं और वे भी अपनी पढ़ाई ठीक तरह से नहीं कर पा रहे हैं। कर्मचारियों ने एसडीएम से गुहार लगाकर उनको समय पर वेतन देने की मांग की।
नोटः आपके पास भी मजदूरों से संबंधित कोई खबर को हो तो मजदूरनामा ब्लाग पर प्रकाशित करने के लिए mazdoornama@gmail.com पर ईमेल करें। मजदूरनामा टीम
राजधानी के अनेक इलाकों में दिल्ली नगर निगम के सफाई कर्मचारी निगम द्वारा कथित तौर पर वेतन नहीं दिए जाने के खिलाफ काम नहीं कर रहे हैं। अधिकारियों ने कहा कि निगम के नजफगढ़, करोलबाग, शाहदरा उत्तर और दक्षिण, दक्षिण और मध्य दिल्ली जोन के कर्मचारी सप्ताहांत में काम पर नहीं आए।
आंदोलन को गैरकानूनी ठहराते हुए एमसीडी ने चेतावनी दी है कि सोमवार से काम के बजाय धरना-प्रदर्शन करने वाले सफाई कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
सफाई कर्मचारियों का एक सप्ताह से चल रहा आंदोलन एमसीडी को भारी पड़ रहा है। आयुक्त केएस मेहरा ने कर्मचारी नेताओं के साथ बैठक में उनकी अधिकतर मांगें ली थीं। स्थायी समिति अध्यक्ष योगेंद्र चंदोलिया भी सार्वजनिक तौर पर सफाई कर्मियों की मांगें मानने की घोषणा कर चुके हैं। इसके बावजूद आंदोलन खत्म होने के बजाय तेज हो गया है। एमसीडी प्रवक्ता दीप माथुर का कहना है कि प्रशासन ने आंदोलनकारी सफाई कर्मियों के प्रति अब कोई नरमी नहीं बरतने का फैसला किया है। उन्हें हर हाल में काम करना होगा। ऐसा नहीं करने पर विभागीय कार्रवाई होगी।
उधर, कर्मचारियों के आंदोलन के चलते एमसीडी का 1 जुलाई से शुरू हुआ विशेष सफाई अभियान टांय-टांय फिस्स है। आंदोलनकारियों ने जगह-जगह कूड़ा डालकर सफाई व्यवस्था चौपट कर दी है। शनिवार को तो उन्होंने उस कालोनी में उन्होंने प्रदर्शन किया, जिसमें मेयर पृथ्वीराज साहनी रहते हैं। उनकी कालोनी के चारों ओर सड़कों पर कर्मचारियों ने कूड़ा फैला दिया।
निगम ने कहा कि दैनिक वेतन वाले कर्मचारियों का पंजीकरण अभी उपस्थिति की बायोमेट्रिक प्रणाली में नहीं है और कुछ को इसके इस्तेमाल में तकनीकी कठिनाइयां आ रहीं हैं।
हड़ताली कर्मचारी चाहते हैं कि निगम में हाजिरी के लिए इस तरह की तकनीकी प्रणाली का इस्तेमाल नहीं किया जाए लेकिन एमसीडी इस मांग पर विचार नहीं कर रहा।
एमसीडी की स्थाई समिति के अध्यक्ष योगेंद्र चंडोलिया ने कहा कि सफाई कर्मचारी अनेक मुद्दों पर पिछले कुछ महीनों से हड़ताल कर रहे हैं। नियमितीकरण की उनकी मांग जायज है और इस पर विचार किया गया है, लेकिन उन्हें बायोमेट्रिक प्रणाली से हाजिरी लगानी चाहिए। हम किसी तकनीकी समस्या पर विचार करेंगे लेकिन इस प्रणाली को नहीं अपनाने का सवाल ही नहीं है।
सफाई कर्मियों को समय पर नहीं मिलता वेतन
गोहाना, 20 जून नगरपालिका के ठेके पर लगे सफाई कर्मचारियों को पिछले तीन माह से वेतन न मिलने के कारण उनमें रोष पनप रहा है। समय पर वेतन का भुगतान न होने के कारण सफाई कर्मचारियों की आजीविका भी प्रभावित हो रही है। कर्मचारियों ने बुधवार को एसडीएम से मुलाकात कर उनको हर माह समय पर वेतन का भुगतान करवाने की मांग की।
ठेके पर लगे सफाई कर्मचारी राजे, जितेंद्र, गौतम, विकास, देशराम, राजू, सतबीर, रिंकू, अनु, सीमा, अनीता, कविता, विजय, नीरू, सुनीता, रानी, राजेश आदि वेतन समस्या को लेकर बुधवार को एसडीएम से मिलने पहुंचे। मौके पर मौजूद सफाई कर्मचारियों ने कहा कि उनको तीन माह से वेतन नहीं मिल है। वेतन न मिलने के कारण उनके घर का खर्च चलना मुश्किल हो गया है। उनका परिवार भुखमरी की कगार पर पहुंच चुके हैं। उनके बच्चों की पढ़ाई की फीस भी नहीं दी जा रही है, जिसकी वजह से उनके बच्चे में परेशानी में हैं और वे भी अपनी पढ़ाई ठीक तरह से नहीं कर पा रहे हैं। कर्मचारियों ने एसडीएम से गुहार लगाकर उनको समय पर वेतन देने की मांग की।
नोटः आपके पास भी मजदूरों से संबंधित कोई खबर को हो तो मजदूरनामा ब्लाग पर प्रकाशित करने के लिए mazdoornama@gmail.com पर ईमेल करें। मजदूरनामा टीम
Sunday, July 4, 2010
बंद के खिलाफ भ्रामक प्रचार कर रही है कांग्रेस सरकार
नई दिल्ली,एजेंसी
पेट्रोलियम उत्पादों की कीमत बढोतरी के विरोध में भाजपा और वाम सहित विभिन्न दलों के कल के भारत बंद को '' राष्ट्र की प्रगति में बाधक ÓÓ बताने वाले आज जारी सरकारी विज्ञापनों की विपक्ष ने कड़ी निंदा की है। उसने कहा कि विपक्ष से राय मश्विरा करके मंहगाई का समाधान निकालने की बजाय सरकार विज्ञापनों पर करोडों रूपए खर्च कर जनता को गुमराह कर रही है।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की ओर से जारी विज्ञापन में भारत बंद को समस्या का समाधान नहीं बताते हुए कहा गया है कि पाकिस्तान में रसोई गैस सिलिण्डर की कीमत 577 रूपए, बांग्लादेश में 537, श्रीलंका में 822 और नेपाल में 782 रूपए है जबकि भारत में इसकी कीमत महज 345 रूपए है।
राजग के कार्यकारी अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी और संयोजक शरद यादव ने इन विज्ञापनों पर सख्त आपत्ति जताते हुए इन्हें जनता को गुमराह करने वाला बताया। राजग की बैठक के बाद इन नेताओं ने कहा कि सरकार ने ए तो बताया कि रसोई गैस भारत के मुकाबले उक्त देशों में सस्ती है लेकिन इस बात को छिपा गई कि पेट्रोल और डीजल के दाम इन्हीं देशों में भारत के मुकाबले कहीं कम है।
पेट्रोल पाकिस्तान में 22 रूपए, बांग्लादेश में 26, नेपाल में 34, अफगानिस्तान में 30 और म्यांमार में 36 रूपए प्रति लीटर बिक रहा है जबकि भारत में यह 53 रूपए प्रति लीटर है।
पेट्रोलियम उत्पादों की कीमत बढोतरी के विरोध में भाजपा और वाम सहित विभिन्न दलों के कल के भारत बंद को '' राष्ट्र की प्रगति में बाधक ÓÓ बताने वाले आज जारी सरकारी विज्ञापनों की विपक्ष ने कड़ी निंदा की है। उसने कहा कि विपक्ष से राय मश्विरा करके मंहगाई का समाधान निकालने की बजाय सरकार विज्ञापनों पर करोडों रूपए खर्च कर जनता को गुमराह कर रही है।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की ओर से जारी विज्ञापन में भारत बंद को समस्या का समाधान नहीं बताते हुए कहा गया है कि पाकिस्तान में रसोई गैस सिलिण्डर की कीमत 577 रूपए, बांग्लादेश में 537, श्रीलंका में 822 और नेपाल में 782 रूपए है जबकि भारत में इसकी कीमत महज 345 रूपए है।
राजग के कार्यकारी अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी और संयोजक शरद यादव ने इन विज्ञापनों पर सख्त आपत्ति जताते हुए इन्हें जनता को गुमराह करने वाला बताया। राजग की बैठक के बाद इन नेताओं ने कहा कि सरकार ने ए तो बताया कि रसोई गैस भारत के मुकाबले उक्त देशों में सस्ती है लेकिन इस बात को छिपा गई कि पेट्रोल और डीजल के दाम इन्हीं देशों में भारत के मुकाबले कहीं कम है।
पेट्रोल पाकिस्तान में 22 रूपए, बांग्लादेश में 26, नेपाल में 34, अफगानिस्तान में 30 और म्यांमार में 36 रूपए प्रति लीटर बिक रहा है जबकि भारत में यह 53 रूपए प्रति लीटर है।
भारत बंद से पहले मुंबई में हजारों लोगों को गिरफ्तार किया
मुंबई, 4 जुलाई
ईंधन के दाम बढ़ाने के खिलाफ विपक्षी दलों के सोमवार को राष्ट्रव्यापी बंद के मद्देनजर किसी अप्रिय घटना को टालने के इरादे से पुलिस ने आज एक हजार से ज्यादा शरारती तत्वों को यहां एहतियातन हिरासत में ले लिया।
पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ''बतौर एहतियात, हमने शहर के विभिन्न इलाकों से ऐसे एक हजार से ज्यादा शरारती तत्वों को हिरासत में लिया है जो हिंसा में शामिल हो सकते हैं। इनमें से कुछ को अदालतों में पेश करके पुलिस हिरासत में लिया गया है जबकि बाकी को सोमवार को पेश किया जाएगा।ÓÓ
उन्होंने बताया, ''हमने अपराध प्रक्रिया संहिता की धारा 149 के तहत नोटिस जारी किए, जो पुलिस को संज्ञेय अपराध रोकने की इजाज़त देती है। हमने विभिन्न राजनीतिक दलों के दो हजार से ज्यादा कार्यकर्ताओं को नोटिस जारी किया। कोई भी व्यक्ति या राजनीतिक दल जो हिंसा या आगजनी में शामिल हुआ तो उसे मुआवजे की भरपाई करनी होगी।ÓÓ
तमिलनाडु सरकार ने कल आहूत भारत बंद के दौरान किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। इस बंद का आह्वान विपक्षी दलों ने ईंधन की कीमतों में वृद्धि के खिलाफ किया है।
रेलवे स्टेशनों, हवाई अड्डों और बस अड्डों समेत सभी महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थलों पर पुलिस सुरक्षा मुहैया कराई गई है। उन्होंने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो चलती बसों को भी सुरक्षा मुहैया कराई जाएगी।
सरकार ने सामान्य जनजीवन को बाधित करने का प्रयास करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है।
अन्नाद्रमुक, वाम दलों और उनके सहयोगी दलों के अतिरिक्त भाजपा ने कल भारत बंद का आह्वान किया है।
ईंधन के दाम बढ़ाने के खिलाफ विपक्षी दलों के सोमवार को राष्ट्रव्यापी बंद के मद्देनजर किसी अप्रिय घटना को टालने के इरादे से पुलिस ने आज एक हजार से ज्यादा शरारती तत्वों को यहां एहतियातन हिरासत में ले लिया।
पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ''बतौर एहतियात, हमने शहर के विभिन्न इलाकों से ऐसे एक हजार से ज्यादा शरारती तत्वों को हिरासत में लिया है जो हिंसा में शामिल हो सकते हैं। इनमें से कुछ को अदालतों में पेश करके पुलिस हिरासत में लिया गया है जबकि बाकी को सोमवार को पेश किया जाएगा।ÓÓ
उन्होंने बताया, ''हमने अपराध प्रक्रिया संहिता की धारा 149 के तहत नोटिस जारी किए, जो पुलिस को संज्ञेय अपराध रोकने की इजाज़त देती है। हमने विभिन्न राजनीतिक दलों के दो हजार से ज्यादा कार्यकर्ताओं को नोटिस जारी किया। कोई भी व्यक्ति या राजनीतिक दल जो हिंसा या आगजनी में शामिल हुआ तो उसे मुआवजे की भरपाई करनी होगी।ÓÓ
तमिलनाडु सरकार ने कल आहूत भारत बंद के दौरान किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। इस बंद का आह्वान विपक्षी दलों ने ईंधन की कीमतों में वृद्धि के खिलाफ किया है।
रेलवे स्टेशनों, हवाई अड्डों और बस अड्डों समेत सभी महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थलों पर पुलिस सुरक्षा मुहैया कराई गई है। उन्होंने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो चलती बसों को भी सुरक्षा मुहैया कराई जाएगी।
सरकार ने सामान्य जनजीवन को बाधित करने का प्रयास करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है।
अन्नाद्रमुक, वाम दलों और उनके सहयोगी दलों के अतिरिक्त भाजपा ने कल भारत बंद का आह्वान किया है।
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