ऐसा लगता है कि मारुति सुजुकी के मानेसर सयंत्र के संघर्षरत मज़दूरों का संघर्ष अब एक कठिन दौर से गुजर रहा है. इस बार पुनः मजदूरों के संघर्ष में उतरने का मुख्य कारण यही है कि पिछले जून में 13 दिन चले उनके आन्दोलन में जो आंशिक सफलता मिलि थी वह मारुति प्रबन्धन के गले नहीं उतर रही थी और उन्होंने उसका बदला लेने के लिए मजदूरों को संघर्ष में उतरने के लिए बाध्य कर दिया. मालिको ने फैक्टरी की घेराबंदी और पूरी तैयारी केसाथ इस बार मजदूरों के आन्दोलन का पूरी तरह दमन कर देने के उद्देश्य से उन्हें संघर्ष के लिए उकसाया. 16 जून के समझौते कि भावना का पूरी तरह उल्लंघन करते हुए मजदूरों को बर्खास्त करना शुरू कर दिया और अच्छे व्यव्हार के करार पर हस्ताखर करवाने के लिए मजबूर कर मजदूरों को हड़ताल में उतरने के लिए उकसावा दिया. इसके पहले उसने लक्ष्य पूरा न होने और ख़राब गुणवत्ता के नाम पर अनुशाश्नात्मक करवाई कि पूर्व पीठिका तैयार कर ली थी.
ऐसे में यह जरुरी है कि मारुति सुजुकी के संघर्षरत मजदूरों को हर तरह का सहयोग और समर्थन किया जाय. पिछले बार के संघर्ष में जिस तरह उन्हें पुरे मानेसर गुडगाव इलाके के मजदूरों का समर्थन प्राप्त हुआ था उसी तरह का सहयोग और समर्थन ही अब उनके आन्दोलन को सफलता के मुकाम तक ले जा सकती है.
कार बनाने वाली देश की प्रमुख कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया [एमएसआई] और उसके मानेसर कारखाने के कर्मचारियों के बीच गतिरोध जारी है। कंपनी ने मंगलवार को 16 और स्थाई कर्मचारियों को निलंबित कर दिया जबकि 12 प्रशिक्षुओं की सेवा समाप्त कर दी। इस गतिरोध के कारण कंपनी का उत्पादन मंगलवार दूसरे दिन भी पूरी तरह प्रभावित रहा।
मारुति सुजुकी के प्रवक्ता ने कहा कि अभी तक उत्पादन शुरू नहीं हुआ है लेकिन ठेका कर्मचारियों तथा तकनीकीविदों की सेवा लिए जाने जैसे वैकल्पिक उपायों से मंगलवार उत्पादन शुरू होने के संकेत हैं। उत्पादन और गुणवत्ता से समझौते का मामला पिछले सप्ताह सामने आने के बाद से कंपनी कर्मचारियों के प्रति कड़ा रूख अपना रही है। कंपनी ने सोमवार 10 कर्मचारियों को निलंबित कर दिया था जबकि पांच अन्य को बर्खास्त कर दिया था। इसके अलावा छह प्रशिक्षु कर्मचारियों की सेवा समाप्त कर दी थी। प्रवक्ता ने कहा कि हमने 16 और स्थाई कर्मचारियों को मंगलवार को निलंबित कर दिया और 12 अन्य तकनीकी प्रशिक्षुओं की सेवा समाप्त कर दी।
जिन कर्मचारियों को निलंबित और बर्खास्त किया गया है, उन पर पिछले सप्ताह उत्पादित कारों की गुणवत्ता के साथ छेड़छाड़ कर कंपनी को नुकसान पहुंचाने का आरोप है। बहरहाल, कर्मचारियों का कहना है कि प्रबंधन जून में उनकी 13 दिन की हड़ताल का बदला लेने के लिए यह सब कर रहा है। कर्मचारियों ने हरियाणा के मानसेर स्थित कारखाने में नए कर्मचारी संघ को मान्यता देने को लेकर हड़ताल की थी।
उत्पादन और गुणवत्ता प्रभावित होने की खबर के बाद कंपनी ने सोमवार को 'बेहतर आचरण बाड' पर हस्ताक्षर के बिना कारखाने में प्रवेश से कर्मचारियों को मना कर दिया। उसके कारण सोमवार उत्पादन पूरी तरह ठप रहा। नए यूनियन मारुति सुजुकी इंप्लायज यूनियन [एमएसईयू] के महासचिव शिव कुमार ने कहा कि कारखाने में यूनियन के गठन के हमारे आवेदन को हरियाणा सरकार द्वारा खारिज किए जाने के मद्देनजर प्रबंधन हमारे खिलाफ बदले की कार्रवाई कर रहा है और हस्ताक्षर करने के लिए बाध्य कर रहा है। कुमार ने जून में हुए आदोलन का नेतृत्व किया था।
उन्होंने कहा कि निलंबित और बर्खास्त कर्मचारियों में प्रस्तावित एमएसईयू के पदाधिकारी शामिल हैं। हालाकि प्रबंधन सूत्रों का कहना है कि पिछले कुछ सप्ताह से एमएसआई उत्पादन लक्ष्य हासिल करने तथा गुणवत्ता को लेकर गंभीर मुद्दों का सामना कर रहा है। सूत्र ने कहा था, '24 अगस्त को 1,230 कार उत्पादित करने की योजना थी लेकिन केवल 437 कार एसेंबल किए गए। इसमें से केवल 96 कार गुणवत्ता मानकों पर खरा उतर सके। उसने कहा कि कर्मचारी उत्पादन घटा रहे हैं तथा गुणवत्ता से जानबूझकर समझौता कर रहे हैं।
हालाकि इस बारे में पूछे जाने पर कुमार ने कहा कि कुछ प्रबंधन समर्थित कर्मचारी उत्पाद तैयार होने के बाद यह कर रहे हैं। वे जून में हुए आदोलन का बदला लेने के लिए ऐसा कर रहे हैं। कुछ कर्मचारियों पर कंपनी को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाते हुए कंपनी प्रबंधन ने बेहतर आचरण के वचन पर हस्ताक्षर और उसे लागू करने का निर्णय किया है। इसमें कर्मचारियों से यह आश्वासन मांगा गया है कि वे उत्पादन कम नहीं करेंगे और किसी भी ऐसी गतिविधियों में शामिल नहीं होंगे जिससे कारखाने में उत्पादन प्रभावित होता है।
रेड ट्यूलिप के सौजन्य से
बाल श्रम,आत्महत्याएं,औद्योगिक दुर्घटनाएं
23 मार्च
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श्रम
श्रम कानून
सज़ा
सिंगापुर
सेज
हड़ताल
Thursday, September 8, 2011
Thursday, June 16, 2011
मानेसर स्थित मारुति सुजकी इंडिया में श्रमिकों की हड़ताल समाप्त
11 बर्खास्त कर्मचारी वापस हुए, शनिवार से कामकाज शुरू करेंगे कर्मचारी
मानेसर स्थित मारुति सुजकी इंडिया में नई यूनियन के गठन को लेकर चली आ रही श्रमिक हड़ताल का पटाक्षेप बृहस्पतिवार की देर रात हो गया। श्रमिक शनिवार से कामकाज शुरू करेंगे।
हरियाणा के श्रम एवं रोजगार राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) शिवचरण लाल शर्मा की मध्यस्थता में श्रमिकों व प्रबंधन के बीच बृहस्पतिवार की देर रात हुई बैठक में एक ऐसा समझौता हुआ है जिससे यह पता चलता है की तेरह दिनके अपने शानदार संघर्ष के बावजूद हरियाणा सरकार और मारुति प्रबन्धन के मिलीभगत और दबाव के चलते मजदूरों को कुछ झुक कर समझौता करना पड़ा है। समझौते के तहत मारुति सुजकी इंडिया द्वारा बर्खास्त किए गए सभी 11 कर्मियों को वापस काम पर ले लियागया है। नई यूनियन की माँग के बारे में स्थिति स्पष्ट नहीं है ऐसा लगता है की उसके प्रस्ताव को टाल दिया गया। बीबीसी ने यह खबर दी है कि " कर्मचारी संगठनों ने अलग यूनियन बनाने की मांग छोड़ दी है"। जबकि एन ड़ी टी वी खबर का कहना है कि "कर्मचारी भी प्रबंधन की इस मांग के सामने झुक गए हैं कि कम्पनी में दूसरी यूनियन नहीं बनेगी।" नवभारत टाइम्स के अनुसार "यूनियन बनाने पर कोई चर्चा नहीं हुईं।"
श्रम मंत्री शिवचरण लाल शर्मा के हवाले से सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि शनिवार से सभी कर्मचारी काम पर लौटेंगे। शुक्रवार को कंपनी में अवकाश घोषित कर दिया गया है। इसके बदले कर्मचारी रविवार को काम करेंगे। हड़ताल पर रहे कर्मियों का 13 + 13 (तेरह दिन की हड़ताल और इतने ही दिन का वेतन) का वेतन काटा जाएगा। बर्खास्त किए गए वे 11 कर्मचारी जिन्हें काम पर वापस ले लिया गया है, की प्रबंधन द्वारा अनुशासनात्मक जांच की जाएगी। श्रमिकों ने मारुति प्रबंधन, श्रम मंत्री और श्रम अधिकारियों को आश्वासन दिया कि 13 दिनों की हड़ताल के दौरान जो उत्पादन प्रभावित हुआ है, उसे अतिरिक्त काम कर पूरा करेंगे।
सिविल लाइन स्थित पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में दोपहर 2 बजे से प्रदेश सरकार, जिला प्रशासन, मैनेजमेंट और कर्मचारी प्रतिनिधियों के बीच शुरू हुई बातचीत देर रात तक चलती रही। बैठक में मारुति सुजकी इंडिया प्रबंधन की ओर से एलके जैन, आरएस गांधी, अनिल गौड़, सीएस राजू, श्रम विभाग के वित्तायुक्त सरबन सिंह, श्रमायुक्त सतवंसी अहलावत, अतिरिक्त श्रमायुक्त नितिन यादव, उपायुक्त पीसी मीणा, उप श्रमायुक्त जेपी मान तथा श्रमिकों की ओर से रविंदर कुमार, ऋषिपाल, सोनू कुमार,नवीन कुमार, शिव कुमार, सुमित ने समझौता पर हस्ताक्षर किए।
इस पूरे प्रकरण में हरियाणा सरकार और उसके श्रम विभाग का आचरण शुरू से बहुत घृणास्पद और संदेहजनक रहा है। समझौते से ठीक पहले प्रदेश के श्रम एवं रोजगार राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) पंडित शिवचरण लाल शर्मा के बयान से भी यह बात साबित हो जाती है। एक संवाददाता से बातचीत में ने कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि मारुति कंपनी में चल रहा श्रमिक विवाद जल्द ही सुलझ जाएगा। इसके लिए वे हर स्तर पर प्रयासरत है। अपनी मध्ययुगीन पितृसत्तात्मक सोच जाहिर करते हुए उनका कहना था कि ऐसा विवाद फिर कहीं पैदा न हो, इसके लिए मालिक व श्रमिक के बीच बाप-बेटे जैसा संबंध स्थापित करने पर बल देना होगा। कितने नायब विचार है। ऐसा व्यक्ति जिसे भारत के श्रम कानूनों की भी कोई जानकारी नहीं है और यह भी नहीं जानता है कि मालिक- मजदूरों के बीच का सम्बन्ध अधिकारों के संतुलन के आधार पर चलता है न कि उनकी पितृसत्तात्मक सोच के अनुरूप एक राज्य का श्रम मंत्री कैसे हो सकता है।
फ़िलहाल आन्दोलन समाप्त हो गया है लेकिन इसका सार संकलन किया जाना और उससे सबक निकला जाना अभी बाकी है।
मानेसर स्थित मारुति सुजकी इंडिया में नई यूनियन के गठन को लेकर चली आ रही श्रमिक हड़ताल का पटाक्षेप बृहस्पतिवार की देर रात हो गया। श्रमिक शनिवार से कामकाज शुरू करेंगे।
हरियाणा के श्रम एवं रोजगार राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) शिवचरण लाल शर्मा की मध्यस्थता में श्रमिकों व प्रबंधन के बीच बृहस्पतिवार की देर रात हुई बैठक में एक ऐसा समझौता हुआ है जिससे यह पता चलता है की तेरह दिनके अपने शानदार संघर्ष के बावजूद हरियाणा सरकार और मारुति प्रबन्धन के मिलीभगत और दबाव के चलते मजदूरों को कुछ झुक कर समझौता करना पड़ा है। समझौते के तहत मारुति सुजकी इंडिया द्वारा बर्खास्त किए गए सभी 11 कर्मियों को वापस काम पर ले लियागया है। नई यूनियन की माँग के बारे में स्थिति स्पष्ट नहीं है ऐसा लगता है की उसके प्रस्ताव को टाल दिया गया। बीबीसी ने यह खबर दी है कि " कर्मचारी संगठनों ने अलग यूनियन बनाने की मांग छोड़ दी है"। जबकि एन ड़ी टी वी खबर का कहना है कि "कर्मचारी भी प्रबंधन की इस मांग के सामने झुक गए हैं कि कम्पनी में दूसरी यूनियन नहीं बनेगी।" नवभारत टाइम्स के अनुसार "यूनियन बनाने पर कोई चर्चा नहीं हुईं।"
श्रम मंत्री शिवचरण लाल शर्मा के हवाले से सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि शनिवार से सभी कर्मचारी काम पर लौटेंगे। शुक्रवार को कंपनी में अवकाश घोषित कर दिया गया है। इसके बदले कर्मचारी रविवार को काम करेंगे। हड़ताल पर रहे कर्मियों का 13 + 13 (तेरह दिन की हड़ताल और इतने ही दिन का वेतन) का वेतन काटा जाएगा। बर्खास्त किए गए वे 11 कर्मचारी जिन्हें काम पर वापस ले लिया गया है, की प्रबंधन द्वारा अनुशासनात्मक जांच की जाएगी। श्रमिकों ने मारुति प्रबंधन, श्रम मंत्री और श्रम अधिकारियों को आश्वासन दिया कि 13 दिनों की हड़ताल के दौरान जो उत्पादन प्रभावित हुआ है, उसे अतिरिक्त काम कर पूरा करेंगे।
सिविल लाइन स्थित पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में दोपहर 2 बजे से प्रदेश सरकार, जिला प्रशासन, मैनेजमेंट और कर्मचारी प्रतिनिधियों के बीच शुरू हुई बातचीत देर रात तक चलती रही। बैठक में मारुति सुजकी इंडिया प्रबंधन की ओर से एलके जैन, आरएस गांधी, अनिल गौड़, सीएस राजू, श्रम विभाग के वित्तायुक्त सरबन सिंह, श्रमायुक्त सतवंसी अहलावत, अतिरिक्त श्रमायुक्त नितिन यादव, उपायुक्त पीसी मीणा, उप श्रमायुक्त जेपी मान तथा श्रमिकों की ओर से रविंदर कुमार, ऋषिपाल, सोनू कुमार,नवीन कुमार, शिव कुमार, सुमित ने समझौता पर हस्ताक्षर किए।
इस पूरे प्रकरण में हरियाणा सरकार और उसके श्रम विभाग का आचरण शुरू से बहुत घृणास्पद और संदेहजनक रहा है। समझौते से ठीक पहले प्रदेश के श्रम एवं रोजगार राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) पंडित शिवचरण लाल शर्मा के बयान से भी यह बात साबित हो जाती है। एक संवाददाता से बातचीत में ने कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि मारुति कंपनी में चल रहा श्रमिक विवाद जल्द ही सुलझ जाएगा। इसके लिए वे हर स्तर पर प्रयासरत है। अपनी मध्ययुगीन पितृसत्तात्मक सोच जाहिर करते हुए उनका कहना था कि ऐसा विवाद फिर कहीं पैदा न हो, इसके लिए मालिक व श्रमिक के बीच बाप-बेटे जैसा संबंध स्थापित करने पर बल देना होगा। कितने नायब विचार है। ऐसा व्यक्ति जिसे भारत के श्रम कानूनों की भी कोई जानकारी नहीं है और यह भी नहीं जानता है कि मालिक- मजदूरों के बीच का सम्बन्ध अधिकारों के संतुलन के आधार पर चलता है न कि उनकी पितृसत्तात्मक सोच के अनुरूप एक राज्य का श्रम मंत्री कैसे हो सकता है।
फ़िलहाल आन्दोलन समाप्त हो गया है लेकिन इसका सार संकलन किया जाना और उससे सबक निकला जाना अभी बाकी है।
Wednesday, June 15, 2011
अपील : मारुति सुजुकी के संघर्षरत मजदूरों को सहयोग और समर्थन तेज करें !

मानेसर स्थित मारुति सुजुकी इंडिया के संयंत्र में हड़ताल आज बारहवें दिन भी जारी रही। आज, बुधवार को हड़ताली मजदूरों और प्रबंधन या प्रशासन के बीच कोई वार्ता नहीं हुई । इस तरह कल मुख्य मंत्री भूपिंदर सिंह हूडा के जिस अपील पर अन्य कारखानों में सांकेतिक हड़ताल स्थगित कर दी गयी थी, वह खोखली साबित हुई। हड़ताली मजदूरों की जायज माँगों पर कोई तवज्जो देने की जगह आज शाम मुख्य मंत्री भूपिंदर सिंह हूडा ने मारुति सुजुकी इंडिया के प्रबन्ध निदेशक और सी ई ओ शिंजो नाकानिशी और अन्य उच्चाधिकारियों से मुलाकात की और ऐसा समझा जाता है कि उन्हें नयी यूनियन न बनाने देने में सरकार के सहयोग का आश्वासन दिया।
दूसरी ओर, अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एटक) के महासचिव अनिल कुमार ने बताया कि "हम मारुति सुजुकी श्रमिकों के साथ एकजुटता में 17 जून को एक दिन का भूख हड़ताल करेंगे और 20 जून को दो घंटे के लिए काम बन्द रखा जाएगा। अगर तब तक एक अलग यूनियन और 11 बर्खास्त कर्मचारियों की बहाली की मांग को स्वीकार नहीं कर लिया जाता है।" कुमार के अनुसार, मजदूर 17 जून को काम पर तो आएंगे लेकिन वे भूखे रहेंगे और 20 जून को गुड़गांव, रेवाड़ी, धारूहेड़ा और मानेसर के हरियाणा के औद्योगिक क्षेत्रों में स्थित कारखानों में से अधिकांश में दो घंटे तक उत्पादन ठप रखा जायेगा।
गुड़गांव, रेवाड़ी, धरुहेरा और मानेसर और अन्य सभी जगह से 65 कारखानों के 20,000 से अधिक मजदूरों द्वारा 17 जून को भूख हड़ताल और 20 जून को सुबह 11 बजे से दोपहर एक बजे तक टूल डाउन में शामिल होने की सहमति देने का समाचार मिला है।
इस हड़ताल के बारे में मारुति प्रबंधन द्वारा बार बार अपना रुख बदलने और पिछले बारह दिनों से भूखे प्यासे फैक्टरी शेड में धरना दे रहे मजदूरों को बिजली-पानी तक की सुविधा से वंचित रखने एवं उन्हें अब भी तरह तरह से उत्पीड़ित करने से यह साफ हो गया है की वह समस्या का न्यायसंगत समाधान के बारे में गम्भीर नहीं है। वह सिर्फ यह चाहता है कि संघर्षरत मजदूरों को थका कर समर्पण करने के लिए बाध्य कर दिया जाय। हरियाणा सरकार और उसके श्रम विभाग का रवैया तो और भी घृणास्पद है। उसके श्रम विभाग के अधिकारियों द्वारा नए यूनियन के गठन की गोपनीय सूचना को मारुति प्रबंधन को लीक करने से चलते ही यह संकट पैदा हुआ और जब से वार्ताओं को दौर शुरू हुआ, उन्होंने लगातार मारुति प्रबंधन को अपना रुख बदलने की इजाजत दी। ऐसे में लगता यही है कि लड़ाई लम्बी खिंच गई है।
लेकिन फिर भी यह लड़ाई महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे न केवल मारुति कर्मचारियों के भविष्य का फैसला होने वाला है बल्कि, इस बात का भी फैसला होने वाला है कि न सिर्फ इस औद्योगिक क्षेत्र में बल्कि पूरे उत्तर भारत में भविष्य में मजदूरों को अपनी जायज मांगों के लिए संघर्ष करने और उसके लिए जरूरत के अनुसार संगठनों का निर्माण करने की इजाजत होगी कि नहीं। यह सिर्फ जनतांत्रिक अधिकारों को हासिल करने का सवाल नहीं है बल्कि, अतीत के संघर्षों से हासिल जनतांत्रिक अधिकारों को बनाए रखने का भी सवाल है। इस रूप में मारुति के नौजवान मजदूर सिर्फ अपने हकों की लड़ाई नहीं लड़ रहे हैं बल्कि, पूरे मजदूर वर्ग और आम जनता की लड़ाई लड़ रहे हैं। उनकी लड़ाई आज ऐसे मुकाम पर है कि उसे बहुत समझदारी और साहस के साथ आगे ले जाने के जरूरत है। इस काम में उन्हें हर बुद्धिजीवी, हर मजदूर, नौजवान के सहयोग और समर्थन की जरूरत है। हमें एक बार फिर सभी सामाजिक-राजनीतिक संगठनों, उनके कार्यकर्ताओं, प्रगतिशील और जनपक्षधर बुद्धिजीवियों और आम जनता से इन संघर्षरत मजदूरों को हर संभव सहयोग और समर्थन करने की अपील करते हैं।
साथ ही हम यह समझते हैं कि मारुति सुजुकी के मजदूरों का १२ दिन पुराना संघर्ष अब एक बहुत ही नाजुक दौर में प्रवेश कर रहा है। यह एक ऐसा दौर है जब प्रबंधन और प्रशासन यह कोशिश करते हैं कि मजदूर थक हार कर हथियार डाल दें। और अगर ऐसा नहीं होता है तो उनकी ओर से भड़काऊ कार्रवाईयां की जाती हैं जिससे कि उनका आड़ लेकर आन्दोलन का निर्ममता पूर्वक दमन किया जा सके, जैसा कि पिछले दिनों होण्डा के आन्दोलन में हुआ था। हम चाहते हैं कि जो भी संगठन या व्यक्ति इन हड़ताली मजदूरों का समर्थन करना चाहते हैं, वे अपनी ओर से पूरे संयम का परिचय दें और ऐसी कोई कार्रवाई न करें जिससे कि प्रशासन और प्रबंधन को हिंसा की कार्रवाई का बहाना मिल जाए।
हम प्रस्तावित करते हैं कि
१- सभी लोग हरियाणा के मुख्यमंत्री, श्रममंत्री, गृहमंत्री के पास मजदूरों के इस आंदोलन के समर्थन में अधिक से अधिक संख्या में ईमेल, पत्र और तार-फैक्स भेजें और भिजवाएं।
२- मारुति सुजुकी गेट के सामने पहुंच कर धरने पर बैठे मजदूरों के प्रति अपने सहयोग और समर्थन का इजहार करें।
३-इस आंदोलन, उसकी पृष्ठभूमि, आव्यशकता और प्रासंगिकता के बारे में अधिक से अधिक लोगों को सूचित करें और यदि संभव तो प्रचार अभियान चलाएं।
४- मजदूरों के लिए सहयोग और समर्थन जुटाने के लिए अपने-अपने इलाकों में बैठकें और आम सभाएं आयोजित करें।
Tuesday, June 14, 2011
चूहे बिल्ली का खेल खेल रहा है मारुति सुजीकी का मैनेजमेंट

मानेसर से लौटकर विस्तृत रिपोर्ट
10 दिन से मानेसर के मारुति सुजुकी प्लाण्ट में 2000 मजदूर हड़ताल हैं, जिनमें तकरीबन एक हजार मजदूर फैक्ट्री के अंदर बने शेड में 10 दिन से धरने पर बैठे हुए हैं। कल सोमवार को जारी बातचीत टूटने के बाद अब यह आग पूरे गुड़गांव मानेसर में फैलती नजर आ रही है। मानेसर गुड़गांव की लगभग 60- 65 फैक्ट्रियों की यूनियनों के करीब 50 हजार वर्करों ने धरने पर बैठे मजदूरों के समर्थन में आज दो घंटे का टूल डाउन करने की घोषणा की है। इन यूनियनों में हीरो होण्डा, होण्डा मोटर साइकिल इंडिया और रिको आटो जैसी बड़ी फैक्ट्रियों की यूनियनें भी बढ़चढ़ कर भाग ले रही हैं। एटक के अलावा सीटू, इंटक, एचएमएस से जुड़ी हुई यूनियनों के अलावा रिको जैसी फैक्ट्रियों की स्वतंत्र यूनियनें भी इस टूल डाउन को सफल बनाने की कोशिश कर रही हैं।
मानेसर मारुति वर्करों की कल 13 जून को हड़ताल के दसवें दिन मैनेजमेंट और कर्मचारियों के बीच दिन भर वार्ताओं का दौर चलता रहा। देर शाम तक मैनेजमेंट के अड़ियल रवैये और बार-बार अपना रुख बदने के चलते बातचीत टूट गई। पहले तो ऐसा लग रहा था कि मैनेजमेंट नई यूनियन को मान्यता देने पर सहमत हो गया है लेकिन वह मजदूरों द्वारा अपने बर्खास्त साथियों को वापस लिए जाने की मांग पर मैनेजमेंट ने ऐसा दिखाया कि मानो वह उससे सहमत हो गया है। लेकिन उसने अपनी ओर से यह नई शर्त रख दी कि सभी 11 बर्खास्त वर्करों को वापस लिए जाने की स्थित में मजदूरों को मैनेजमेंट की पिट्ठू पुरानी यूनियन को मान लेना पड़ेगा। ऐसी स्थित में बातचीत का टूटना लाजिमी था।
दूसरी ओर, कल दूसरे दिन मानेसर स्थित होण्डा और मानेसर गुड़गांव बेल्ट के अन्य फैक्ट्रियों के वर्करों ने आम सभाओं के माध्यम से हड़ताली मजदूरों का समर्थन किया और घोषणा की कि यदि वार्ताएं बेनतीजा रहती हैं तो वे अगले दिन यानी आज, दिन मंगलवार 14 जून को दो घंटे का टूल डाउन करेंगे। ऐसे उम्मीद है कि आज पूरे गुड़गांव मानेसर बेल्ट में विभिन्न फैक्ट्रियों के 50,000 से अधिक मजदूर इस सांकेतिक हड़ताल में हिस्सेदारी करेंगे। इस हड़ताल को नेतृत्व दे रहे एटक के अलावा इन्टक, एचएमएस भी इसमें शिरकत करेंगी।
कल दोपहर तीन बजे, होण्डा, मानेसर के गेट पर हुई मजदूरों की सभा को सम्बोधित करते हुए एटक के सुरेश गौड़ ने अधिक से अधिक संख्या में मजदूरों को मंगलवार को होने वाले टूल डाउन में शामिल होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मारुति सुजुकी मानेसर के वर्कर साथियों के साथ जो कुछ हो रहा है वह सिर्फ उन्हीं का मुद्दा नहीं है, यह सभी मजदूरों का मुद्दा है और मजदूर वर्ग की आपसी एकजुटता की मिशाल कायम करनी चाहिए।
नलों और बाथरूम तक पर ताला जड़ा
एक तरफ मैनेजमेंट की तरफ से यह बयान आया है कि वह अपने कर्मचारियों की बहुत चिंता करता है और उसके सीएमडी भार्गव कैंटीन में मजदूरों के साथ लाइन में ही खड़ा होकर खाने की प्लेट का इंतजार करते हैं। दूसरी ओर असली स्थित यह है कि इस भीषण गर्मी में टीन शेड के नीचे 10 दिन से धरने पर बैठे एक हजार मजदूरों के लिए पानी के नलों तक को बंद कर दिया गया है। यहां तक कि एक को छोड़कर बाकी सभी बाथरूमों पर ताला जड़ दिया गया है और कैंटीन तो बंद है ही। मजदूर बाहर से खाना मंगा रहे हैं। परिजनों, शुभचिंतकों और यहां तक कि पत्रकारों को भी मजदूरों से मिलने और बातचीत करने नहीं दिया जा रहा है। जो भी वहां जाता है उसे गेट पर तैनात सिक्यूरिटी गार्ड और मैनेजमेंट के लोग सीधे कम्पनी के पीआरओ से मिलने की सलाह देते हैं। हड़ताली मजदूरों के परिजनों से हमें पता चला है कि जिस दिन धरना शुरू हुआ उस दिन मैनेजमेंट की ओर से वर्करों के घरों पर ढोरों फोन किए गए जिनमें उनको धमकी दी गई और परेशान किया गया। जिसके चलते कई मजदूरों के रिश्तेदार धरना स्थल पर पहुंच गए और रोने गाने की स्थिति पैदा हो गई। यह सब कुछ जानबूझ कर वर्करों के मनोबल को तोड़ने के लिए गया था। आखिर अपने प्रिय मजदूरों को मैनेजमेंट इतनी सुविधाएं देकर अपनी मांग मनवाने का यह एक नायाब तरीका अख्तियार किया है।
रोज ही बेहोश हो रहे हैं मजदूर
पता चला है कि भीषण गर्मी और पानी न मिलने की वजह से प्रतिदिन दो चार वर्कर बेहोश हो जाते हैं, जिनकी चिकित्सा की कोई व्यवस्था वहां उपलब्ध नहीं है। हालांकि धरना अभी तक पूरी तरह से शांतिपूर्ण रहा है लेकिन फैक्ट्री प्रबंधन को वहां सैकड़ों की संख्या में निजी सिक्यूरिटी गार्ड तैनात करने की तो सुध है लेकिन अपने ही कर्मचारियों को कुछ बुनियादी सुविधाएं ही उपलब्ध कराने के ख्याल नहीं है। धरना शुरू होने के दूसरे दिन मजदूरों के कुछ शुभचिंतकों ने फैक्ट्री के बाहर टेंट लगाकर उनके लिए कुछ सुविधाएं मुहैया करते रहने की कोशिश की लेकिन मानेसर पुलिस ने उनके टेंट उखाड़कर उन्हें वहां से भगा दिया।
धरने पर बैठे एक मजदूर ने हमें टेलीफोन से सूचित किया कि इन सारी परिस्थितियों के बावजूद वर्करों का मनोबल ऊंचा है और वह अपनी दोनों मांगों- अपनी यूनियन को मान्यता दिए जाने और बर्खास्त साथियों को वापस लिए जाने पर किसी तरह का समझौता करने पर तैयार नहीं हैं। जबकि मैनेजमेंट यह चाहता है कि मजदूरों में फूट डालकर हड़ताल को खत्म करवा दे। अतः कभी वे पांच बर्खास्त मजदूरों को वपास लेने तो कभी छह को वापस लेने की बात कर रहा है।
मजदूरों द्वारा गठित ताजा मारुति सुजुकी एम्प्लाइज यूनियन (एमएसईयू) के महासचिव शिव कुमार ने कहा है कि प्रबंधन द्वारा छह जून को बर्खास्त किए गए सभी 11 वर्करों को वापस लेना ही होगा।
मैनेजमेंट मीडिया के माध्यम से फैक्ट्री को हो रहे घाटे का बढ़ाचढ़ा कर प्रचार कर रहा है लेकिन इस घाटे के लिए असल में वही जिम्मेदार है और वह जानी समझी रणनीति के तहत यह घाटा बर्दास्त कर रहा है। इसके पीछे उस इलाके के सभी फैक्ट्रियों के प्रबंधन का सहयोग हासिल है। जो यह समझते हैं कि यदि मजदूरों द्वारा अपनी मनपसंद यूनियन के गठन की मांग को एक बार मान लिया गया तो भविष्य में सभी फैक्ट्रियों में उनकी मनमानियां नहीं चल पाएंगी और मजदूरों को वे सुविधाएं देनी पड़ेंगी जिनके वे हकदार हैं। जिस तरह से कोई फैक्ट्री बोर्ड का यह विशेषाधिकार है कि वह अपने फैक्ट्री के लिए जैसा भी उचित समझे, प्रबंधन का चुनाव करे, उसी तरह से यह मजदूरों का विशेषाधिकार है कि वह जैसा भी उचित समझे अपने लिए वैसी ही यूनियन का निर्माण करे और जिसे भी उचित समझे उसका पदाधिकारी बनाए। यह एक बुनियादी किस्म का और संविधान प्रदत्त अधिकार है। दरअसल, इस अधिकार को सदा के लिए छीन लेने के उद्देश्य से ही फैक्ट्री प्रबंधन ने इतना अड़ियल रवैया अख्तियार किया हुआ है। और इसी के चलते उसे अपने इस मकसद में इलाके में तमाम फैक्ट्रियों के प्रबंधकों और सम्पूर्ण मालिक वर्ग का सहयोग और समर्थन हासिल हो रहा है। हरियाणा सरकार और श्रम मंत्रालय के अधिकारी भी अपनी मालिक परस्त नीतियों के चलते इनका समर्थन कर रहे हैं और वार्ताओं में उनकी दखलंदाजी भी निष्पक्ष नहीं है।
मारूति के मजदूर कभी बीमार नहीं पड़ते
प्रबंधन ऐसा मान कर चलता है कि उसके कम्पनी के वर्कर कभी बीमार नहीं होते। शायद इसीलिए यहां मजदूरों को सिक लीव का प्रावधान नहीं है। मारुति सुजुकी, मानेसर में 900 परमानेंट कर्मचारी हैं जिन्हें 16,000 रुपये की तनख्वाह मिलती है। हर परमानेंट कर्मचारी को साल भर में सिर्फ 20 छुट्टी मिलती है। हर उस दिन की छुट्टी के लिए, जो कि स्वीकृत नहीं है, हर मजदूर की तनख्वाह से 1200 से लेकर 1600 रुपये की कटौती होती है। इस तरह से केवल स्थाई कर्मचारियों को 11 दिन के हड़ताल से नुकसान एक करोड़ 8 लाख रुपये से लेकर एक करोड़ 58 लाख रुपये के बीच होगा। ऐसा केवल स्थित में होगा जब एक दिन के हड़ताल पर केवल एक दिन की तनख्वाह काटी जाए और कोई पेनाल्टी न लगाई जाए।
संयंत्र में 1500 ट्रेनी कर्मचारी हैं जिन्हें 12,000 वेतन मिलता है और स्थायी बनाए जाने के लिए उन्हें तीन वर्ष तक इसी स्थिति में रहना होता है। 600 कैजुअल वर्कर हैं। हरेक कैजुअल वर्कर को 6,500 रुपये वेतन मिलता है। दोनों ही ट्रेनी और कैजुअल वर्कर को बिना स्वीकृत छुट्टी के लिए उनकी तनख्वाह से प्रति दिन 1200 रुपये की कटौती होती है।
एक न्यूज चैनल के पत्रकार द्वारा किए गए तुलनात्मक अध्ययन से यह स्पष्ट दिखाई पड़ता है कि देश के सबसे बड़े कार निर्माता मारुति सुजुकी के कर्मचारियों को मिलने वाली तनख्वाहें और सुविधाएं इस उद्योग के अन्य क्षेत्रों मसलन होण्डा मोटर्स में मजदूरों को प्राप्त होने वाली तनख्वाहों और सुविधाओं से बहुत नीचे हैं।
मजदूरों की यह भी मांग है कि स्वास्थ्य सुविधाओं में बढ़ोत्तरी की जाए और सिक लीव को फिर से बहाल किया जाए। गुड़गांव में मकान के किरायों में जितनी तेजी से बढ़ोत्तरी हो रही है उसे देखते हुए वे किराया भत्ता को बढ़ाकार 1400 से 4,000 रुपये करने और 600 रुपये महीने आवागमन भत्ता देने की मांग कर रहे हैं जैसा कि हीरो होण्डा के वर्करों को दिया जाता है।
Saturday, June 11, 2011
मारुती के मानेसर प्लाण्ट में हड़ताल आठवें दिन भी जारी

मारुती सुजुकी के मानेसर प्लाण्ट में वर्करों की हड़ताल कल आठवें दिन, शनिवार, 11 जून को भी जारी रही और हरियाणा सरकार द्वारा परसों, बृहस्पतिवार को हड़ताल को प्रतिबंधित किये जाने के बावजूद हड़ताली मजदूर कारखाने के अन्दर डटे रहे. इसी के साथ साथ शनिवार को गुडगाँव और आस पास के सभी ट्रेड यूनियनों के प्रतिनिधियों कि एक बैठक हुई जिसमे आन्दोलन को आगे ले जाने और इस हेतु व्यापक मजदूर आबादी का समर्थन जुटाने का फैसला किया गया. इस उद्देश्य से सोमवार से सभाओं का सिलसिला शुरू किया जायेगा.
दूसरी ओर सरकार के समर्थन और उसके द्वारा कल हड़ताल को प्रतिबंधित किये जाने किये जाने के चलते फैक्ट्री प्रशासन का हौसला बुलन्द है और उसने संघर्षरत मजदूरों की माँगों को मानने से इंकार कर दिया है.
आन्दोलन की पृष्टभूमि
देश की सबसे बड़ी कार कम्पनी मारुति सुजुकी के मानेसर प्लांट में विगत आठ दिन से दो हजार कर्मचारी हड़ताल पर हैं। कर्मचारियों की मांग है कि उनकी यूनियन बनाने की इजाजत दी जाए। यह मांग तो बहुत पहले से ही की जा रही थी लेकिन मैनेजमेंट ने इसे मानने से इंकार करता रहा है। उसका कहना था कि कम्पनी के मसलों को आपसी बातचीत के माध्यम से हल कर लेना एक मध्यम मार्ग है। लेकिन मजदूरों की बढ़ती मांग को देखते हुए मैनेंजमेंट अपना चेहरा साफ सुथरा रखने के लिए गत मई के आखिरी सप्ताह से ही प्रबंधकों की पिट्ठू यूनियन बनाने का गुपचुप काम शुरू कर दिया गया। अकेले अकेले एक एक मजदूर को बुलाकर कंपनी का एचआर ऐसे कागजात पर हस्ताक्षर करवाने लगा जिसके अनुसार प्रबंधन की यूनियन का मजदूर सदस्य माना जाता। यह बात जैसे ही अन्य मजदूरों को पता चली उनमें सुगबुगाहट शुरू हो गई। आखिर चार जून को मारूति वर्करों ने टूल डाउन कर दिया और फैक्ट्री में ही अनियतकालीन धरने पर बैठ गए। मैनेजमेंट पहले अकड़ दिखाता रहा और उसने ताबतड़तोड़ 11 कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया। कहने की जरूरत नहीं कि ये वे ही कर्मचारी हैं जो नए यूनियन बनाने की मांग की अगुआई कर रहे थे। प्रबंधन को मजदूरों की एकता का अनुमान नहीं था। वे सोचते थे नेताओं को बर्खास्त कर आंदोलन की कमर तोड़ देंगे। लेकिन हुआ उल्टा। दो दिन बीतते ही उसे अपने गैरकानूनी कदम को पीछे हटाना पड़ा और वह जितने मजदूरों के हस्ताक्षर करवाए थे वे कागजात मजदूरों को वापस देने पर राजी हो गया। लेकिन वर्करों की मांग थी यूनियन बनाने की। सो वे कम्पनी के अंदर डटे रहे। प्रबंधन को लग रहा था कि मजदूरों का धैर्य टूट जाएगा। लेकिन मजदूर डटे रहे। शायद उन्हें ऐसे मौके के लिए काफी इंतजार करना पड़ता जैसा कि उन्होंने काफी लम्बे समय तक इंतजार किया था।
समर्थन में पूरे गुडगाँव के मजदूर आगे आये
यही कारण रहा कि पाँच दिनों से संघर्षरत कामगारों के समर्थन में 9 जून को गुडगाँव-मानेसर बेल्ट के विभिन्न उद्योगों में कार्यरत मज़दूर भी आ गए. वहाँ के विभिन्न कारखानों में कार्यरत यूनियनों के पदाधिकारियों और कामगारों ने उस दिन मारुती सुजुकी इंडिया के संयंत्र के मुख्यद्वार पर एकत्र होकर सत्याग्रह किया और संघर्षरत मजदूरों की निहायत ही जायज माँग को अविलम्ब माने जाने की माँग की. गुडगाँव के विभिन्न उद्योगों के मजदूरों द्वारा किया गया एकजुटता का यह इजहार एक बहुत ही महत्वपूर्ण घटना थी जिसका दूरगामी प्रभाव पड़ने वाला है।
मजदूरों के तेवर देख प्रबंधन सक्रिय हो गया और उसने हरियाणा सरकार से गुहार लगाई। जैसा कि आज दिखता है कि सरकारें पूंजीपतियों की प्रबंधन कमेटी के तौर पर कार्य कर रही हैं, हरियाणा सरकार ने 10 जून को संविधान द्वार दिए गए कर्मचारियों के मूलअधिकार -हड़ताल- को ही अवैध घोषित कर दिया। यह बहुत सोची समझी रणनीति थी। इसमें हरियाणा के श्रममंत्री ने मजदूरों के पक्ष को बिना जाने समझे ही एकतरफा कदम उठाया। इस कदम से यह बात तो पूरी तरह स्पष्ट हो ही जाती है कि हरियाणा का श्रम मंत्रालय असल में मैनेजमेंट मंत्रालय है। यह ऐसा मंत्रालय है जो मजदूरों का शोषण कैसे किया जाए इस बारे में कम्पनियों के मैनेजमेंट से कंधा से कंधा मिलाकर काम करता है।
...और कुछ सोचने की बातें
इस पूरी कहानी में सबसे बड़ी त्रासदी यह है कि देश का मध्यवर्ग जिन मारूति कारों का बड़े ठाठ से उपयोग करता है उसने कहीं से भी हरियाणा सरकार के इस गैरकानूनी कदम का विरोध करना उचित नहीं समझा। उसे इस बात का अहसास नहीं हो रहा है कि जो भी चीज वह उपयोग में लाता है वह मजदूरों के खून पसीने से बनाए गई हैं। वह जिन वस्त्रों का उपयोग करता है उनमें से ज्यादातर नोएडा गुड़गांव के एक्पोर्ट गारमेंट कारखानों में मजदूर 36-36 घंटे काम करके और कभी कभी जान गंवा कर तैयार करते हैं। मध्यवर्ग के बच्चे जिन कलम-कापी-किताबों को पढ़कर मैनेजर बनने का सपना देखते हैं वे बहुत ही अमानवीय परिस्थित में मजदूर और उनके बच्चों द्वारा तैयार किए जाते हैं। ऐसा कोई बिरला ही सामान होगा जो मध्यवर्ग इस्तेमाल करता है और जिसे बनाने में मजदूरों का खून पसीना न बहा हो।
मैनेजमेंट की नई चाल
ताजा जानकारी के अनुसार मैनेजमेंट ने वर्करों के सामने प्रस्ताव रखा है कि वह कम्पनी के वर्तमान यूनियन में कर्मचारियों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने के लिए तैयार है बशर्ते बर्खास्त किए गए 11 कर्मचारियों को बहाल करने की मांग को वर्कर छोड़ दें। असल में यह प्रबंधन द्वारा मजदूरों की मांग को खारिज करने का बहाना भर है। धरने पर बैठे वर्करों ने इसे मानने से इंकार कर अपने इरादे जता दिए हैं। और उन्होंने ऐसा कर साथियों के साथ एकजुटता दिखाई।
समर्थन की अपील
हम आप सभी से मानेसर के संघर्षरत साथियों का हर सम्भव सहयोग और समर्थन करने की अपील करते है. हमारा प्रस्ताव है कि कि आप हरियाणा के मुख्यमंत्री, गृहमंत्री और श्रममंत्री को अधिक से अधिक संख्या में ईमेल और पत्र भेज कर सरकार की इस दमनकारी कारर्वाई का विरोध करें और संघर्षरत साथियों कि जायज माँगों को जल्द से जल्द मांगे जाने के लिए दबाव बनायें.यह बहूत ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार मजदूरों का हित सुनिश्चित करने की जगह कम्पनी प्रशासन के हितों के अनुरूप कार्य कर रही है.
मुख्यमंत्री
cm@hry.nic.in
लेबर कमिश्नर
labourcommissioner@hry.nic.in
श्रम मंत्रालय
labour@hry.nic.in
Friday, June 10, 2011
क्या यूनियन की मांग करना गुनाह है?
मानेसर के मारुती सुजुकी इंडिया के प्लाण्ट के विगत छह दिनों से संघर्षरत कामगारों के समर्थन में कल बृहस्पतिवार दिनांक 9 जून 2011 को गुडगाँव-मानेसर बेल्ट के विभिन्न उद्योगों में कार्यरत मज़दूर भी आ गए. उन्होंने मारुति प्रबंधन के खिलाफ एक विशाल रैली निकाली। दुर्भाग्य से मीडिया में ब्लैकआउट के चलते इन खबरों का गला घोंट दिया गया। मजदूरनामा को मिले समाचार के अनुसार, वहाँ के विभिन्न कारखानों में कार्यरत यूनियनों के पदाधिकारियों और कामगारों ने मारुती सुजुकी इंडिया के संयंत्र के मुख्यद्वार पर एकत्र होकर सत्याग्रह किया और संघर्षरत मजदूरों की निहायत ही जायज माँग को अविलम्ब माने जाने की माँग की. गुडगाँव के विभिन्न उद्योगों के मजदूरों द्वारा किया गया एकजुटता का यह इजहार एक बहुत ही महत्वपूर्ण घटना हैऔर इससे लड़ाकू साथियों का हौसला बुलन्द हुआ है.
दुनिया भर में चल रहे तमाम उथल पुथल के बावजूद भारतीय शासक वर्ग यह समझने को राजी नहीं है कि मेहनतकश जनता के दमन का रास्ता आखिर भीषण विस्फोट की ओर ले जाता है। भारत में श्रमिक वर्ग के साथ जो अन्याय अत्याचार हो रहा है वह अभूतपूर्व है। और यह रोष ज्वालामुखी बन चुका है। हालत यह हो गई है कि मजदूर यूनियन बनाने की मांग अघोषित तौर पर एक अवैध मांग हो चुकी है जबकि भारतीय संविधान में यह कर्मचारियों का मौलिक अधिकार माना गया है। आखिर यह देश संविधान के अनुसार चल रहा है या पूंजीपतियों के हितों के अनुसार चलाया जा रहा है।
हम आप सभी से मानेसर के संघर्षरत साथियों का हर सम्भव सहयोग और समर्थन करने की अपील करते है. हमारा प्रस्ताव है कि कि आप हरियाणा के मुख्यमंत्री, गृहमंत्री और श्रममंत्री को अधिक से अधिक संख्या में ईमेल और पत्र भेज कर संघर्षरत साथियों कि जायज माँगों को जल्द से जल्द मांगे जाने के लिए दबाव बनायें और यह सुनिश्चित करें कि कम्पनी प्रशासन उनके आन्दोलन का दमन न कर पाये.
मुख्यमंत्री
cm@hry.nic.in
लेबर कमिश्नर
labourcommissioner@hry.nic.in
श्रम मंत्रालय
labour@hry.nic.in.
दुनिया भर में चल रहे तमाम उथल पुथल के बावजूद भारतीय शासक वर्ग यह समझने को राजी नहीं है कि मेहनतकश जनता के दमन का रास्ता आखिर भीषण विस्फोट की ओर ले जाता है। भारत में श्रमिक वर्ग के साथ जो अन्याय अत्याचार हो रहा है वह अभूतपूर्व है। और यह रोष ज्वालामुखी बन चुका है। हालत यह हो गई है कि मजदूर यूनियन बनाने की मांग अघोषित तौर पर एक अवैध मांग हो चुकी है जबकि भारतीय संविधान में यह कर्मचारियों का मौलिक अधिकार माना गया है। आखिर यह देश संविधान के अनुसार चल रहा है या पूंजीपतियों के हितों के अनुसार चलाया जा रहा है।
हम आप सभी से मानेसर के संघर्षरत साथियों का हर सम्भव सहयोग और समर्थन करने की अपील करते है. हमारा प्रस्ताव है कि कि आप हरियाणा के मुख्यमंत्री, गृहमंत्री और श्रममंत्री को अधिक से अधिक संख्या में ईमेल और पत्र भेज कर संघर्षरत साथियों कि जायज माँगों को जल्द से जल्द मांगे जाने के लिए दबाव बनायें और यह सुनिश्चित करें कि कम्पनी प्रशासन उनके आन्दोलन का दमन न कर पाये.
मुख्यमंत्री
cm@hry.nic.in
लेबर कमिश्नर
labourcommissioner@hry.nic.in
श्रम मंत्रालय
labour@hry.nic.in.
Tuesday, June 7, 2011
मारूति वर्करों के साथ एक जुटता की अपील

प्रिय साथी,
मारुती सुजुकी के मानेसर स्थित सयंत्र के मजदूरों का अपनी युनियन को मान्यता प्रदान करने और ठेका मजदूरों को नियमित किये जाने की माँगों के समर्थन में परसों से जारी हड़ताल को आज कम्पनी प्रशासन के दमन का सामना करना पड़ा जब उसने 11 संघर्षरत मजदूरों को बर्खास्त कर दिया. अपने मनपसन्द युनियन के गठन की माँग एक बेहद न्यायसंगत माँग है और इसे किसी भी तरह से नाजायज नहीं कहा जा सकता है, लेकिन कम्पनी प्रशासन ने इस पर ध्यान देने की जगह आन्दोलन के दमन की ओर बढ़ रहा है.
मारुती सुजुकी के मानेसर स्थित सयंत्र के संघर्षरत मजदूरों के समर्थन में कल मंगलवार, 7 जून 2011 को गुडगाँव के सभी यूनियनों और संगठनों की एक विशाल रैली का आयोजन होने वाला है. आप सभी से इसे सफल बनाने और मानेसर के संघर्षरत साथियों का हर सम्भव सहयोग और समर्थन करने की अपील करते है.
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