Saturday, May 29, 2010

प्रफुल्ल पटेल ये कौन सी भाषा बोल रहे हैं


अनुशासनहीनता बर्दाश्त
नहीं की जाएगी

प्रबंधन को खुल्ली छूट, कुछ भी करो

(एक समाचार टीवी चैनल को दिए साक्षात्कार को हूबहू यहां दिया जा रहा है।-मॉडरेटर)


नई दिल्ली, एजेंसी : नागरिक उड्डयन मंत्री प्रफुल्ल पटेल ने कहा है कि एयर इंडिया में अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी और उन्होंने प्रबंधन को हाल में हुई हड़ताल जैसे व्यवधानों से निपटने के लिए पूरी स्वतंत्रता दी है।पटेल ने एक समाचार चैनल के लिए करण थापर को दिए एक साक्षात्कार में कहा, 'मैंने प्रबंधन को यह स्पष्ट कर दिया था कि आपको पूरी आजादी है और इन हालात में जो कुछ जरूरी है, वह आपको करना चाहिए। इस (हड़ताल) तरह की अनुशासनहीनता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।Óयह पूछे जाने पर कि क्या हड़ताल पर जाने के लिए और कर्मचारियों को बर्खास्त किया जाएगा, उन्होंने कहा 'अगर उन्हें (एयर लाइन प्रबंधन को) लगता है तो वह ऐसा करने के लिए स्वतंत्र हैं। हम हस्तक्षेप नहीं करेंगे।Ó एयर लाइन प्रबंधन ने दो यूनियनों की मान्यता खत्म करने और यूनियन नेताओं को बर्खास्त करने का फैसला किया है। इस बारे में सरकार की दूरी बनाए रखते हुए पटेल ने कहा कि फैसला करना प्रबंधन का जिम्मा है।उन्होंने कहा कि एयर इंडिया और इंडियन एयर लाइंस का विलय एक दीर्घकालिक प्रक्रिया है और अंदर से ही इसका विरोध किया गया तथा ऐसे सुनियोजित प्रयास किए गए ताकि यह विलय सफल न हो। इसके लिए कुछ यूनियनें भी जिम्मेदार हैं।नागरिक उड्डयन मंत्री ने माना कि विलय में विलंब हुआ है लेकिन उन्होंने कहा कि विलय एक दिन में होने वाली प्रक्रिया नहीं है। प्रक्रिया में तीन से पांच साल लगते हैं। यह कहना गलत है कि इसमें अंदरूनी कारणों या पुरानी समस्याओं के कारण विलंब हुआ।पटेल ने कहा, 'विलंब हुआ। इस पर संगठन को काम करना था, लेकिन मुझे अब भी लगता है कि अगर लोग इसे अंजाम नहीं देते तो दीर्घकालिक तौर पर उन्हें नुकसान होगा।Ó उन्होंने कहा कि एयर इंडिया की सभी समस्याओं के लिए विलय को जिम्मेदार नहीं ठहराना चाहिए।पटेल ने कहा कि समस्याओं का कारण विलय नहीं है, अन्य समस्याएं हैं। संगठन में दो हिस्से हैं ़ ़ एक है घरेलू परिचालन का जो पूर्व में इंडियन एयरलाइंस था और दूसरा एअर इंडिया है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि मूल तौर पर सब कुछ गलत था। पूरा ढांचा बनाने में समय लगेगा।उन्होंने कहा, 'ऐसा नहीं है कि विलय के बारे मेंं विचार मैंने किया। विलय की चर्चा मंत्रिमंडल में जेआरडी टाटा के दिनों से चल रही थी। प्रयोग हुए लेकिन सफलता नहीं मिली। आखिरकार यह हो गया।Óपटेल ने जेट एयरवेज-एअर सहारा, एअर डेक्कन-किंगफिशर और अमेरिका में इंटरनेशनल कांटीनेंटल तथा यूनाइटेड एयरलाइन्स के विलय का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि विलय लाभकारी रहा है। यह पूछे जाने पर कि क्या एयर इंडिया को पुनर्जीवित नहीं किया जा सकता, और कब इसे बंद कर दिया जाना चाहिए, पटेल ने कहा, 'यह फैसला मैं नहीं कर सकता। यह एक बड़ा मामला है और इस पर फैसला सरकार करेगी। ऐसा मत कहिए कि एअर इंडिया में कुछ भी ठीक नहीं है।Ó उन्होंने कहा, 'आप एक बड़ा मुद्दा उठा रहे हैं कि क्या सरकार को एयरलाइंस का संचालन करना चाहिए या नहीं। सार्वजनिक क्षेत्र और निजी क्षेत्र की एयरलाइंस के संचालन में अंतर है।Óपटेल से पूछा गया कि सरकार इसके निजीकरण के लिए और इसे पेशेवर हाथों में सौंपने के लिए क्यों तैयार नहीं है। इस पर उन्होंने कहा कि पहले ऐसे प्रयास हुए हैं। राजग के शासनकाल में, जब कोशिश की गई तो उत्साहजनक प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसलिए इसका निजीकरण नहीं हो पाया।इस सवाल पर कि क्या एयर एंडिया के नए सीओओ गुस्ताव बाल्दौफ को पूरी स्वतंत्रता दी जाएगी या उनके कामकाज में हस्तक्षेप होगा, पटेल ने कहा, 'बिल्कुल नहीं। उन्हें पूरी स्वतंत्रता होगी। आज तक वहां पूरी आजादी है।Ó

एयर इंडिया के विवाद में प्रधानमंत्री का हस्तक्षेप हो : सीटू

नई दिल्ली, 29 मई : प्रमुख ट्रेड यूनियन संगठन े सीटू े ने एयर इंडिया के विवाद को सुलझाने के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से हस्तक्षेप करने की मांग की है। सीटू का कहना है कि एयर इंडिया के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक अरविन्द जाधव की जोर जबर्दस्ती की नीति और संगठन में बड़े पैमाने पर उत्पीडऩ के कारण उसके कर्मचारी आंदोलन की राह पर हैं। माकपा पोलित ब्यूरो सदस्य और सीटू के उपाध्यक्ष एम के पंधे ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में आरोप लगाया है कि एयर इंडिया के प्रमुख जाधव खुलकर साम्प्रदायिक तत्वों को बढ़ावा दे रहे हैं और मान्यताप्राप्त यूनियनों को कुचलने में लगे हैं। पंधे ने कहा है कि एयर इंडिया के कर्मचारियों ने एयरलाइन के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक की जोर जबर्दस्ती की नीति का विरोध करने के लिए ही 12 जून को एक दिन की हड़ताल का आह्वान किया है। यदि उस दिन हड़ताल होती है तो इससे कुछ दिन यात्रियों को भारी मुसीबत होगी और इसके लिए केवल एयर इंडिया का प्रबंध तंत्र ही जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री से कहा है। ै मुझे उम्मीद है कि आप इन बातों पर ध्यान देंगे और विवाद में हस्तक्षेप तक स्थिति सामान्य करेंगे ताकि एयर इंडिया निजी विमान कंपनियों की ओर से पेश की जा रही ओछी प्रतिस्पर्धा के बावजूद तरक्की कर सके। ै उन्होंने यह आरोप भी लगाया है कि नागरिक उड्डयन मंत्री प्रफुल्ल पटेल और जाधव निजी कंपनियों के हितों को बढ़ाने में लगे हैं। उन्होंने कहा कि यदि उच्च स्तरीय जांच कराई जाती है तो यह साबित हो जाएगा कि ए दोनों निजी कंपनियों के फायदे के लिए एयर इंडिया का नुकसान करने में लगे हैं।

जापान में हजारों अनियमित कर्मचारियों के नौकरियां जाएंगी

टोक्यो, 29 मई : जापान में अक्टूबर 2008 से इस साल जून तक 5,252 कारोबारी कार्यालयों के कुल 2,77,674 अनियमित कर्मचारियों को अपने नौकरी से हाथ धोना पड़ सकता है। जापान के स्वास्थ्य, श्रम एवं कल्याण मंत्रालय के द्वारा किए गए इस सर्वेक्षण में उन श्रमिकों भी शामिल किया गया है जिनके अनुबंध को दोबारा नहीं बढ़ाया गया था। मंत्रालय ने इनकी संख्या में 2660 की बढ़ोतरी दर्ज की। इस सर्वेक्षण में 19 मई तक के आकड़े को शामिल किया गया है। हालांकि मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि पिछले सर्वेक्षण की तुलना में इस बार अनियमित मजदूरों के रोजगार में ज्यादा स्थायित्व दिखाई दे रहा है।ÓÓ जापान में मोटरवाहन उद्योग का केन्द्र कहे जाने वाले शहर आएची में सर्वाधिक लोगों की नौकरियां जा सकती हैं। यहां कुल 45,355 अनियमित कामगारों को अपनी नौकरियों से हाथ धोना पड़ सकता है। इसके अलावा टोक्यो में 16,581 और सिजुओका में 11,342 लोगों की नौकरी जा सकती है।

होजरी उद्योग के मजदूरों का मेहनताना बढ़ा

कानपुर, 29 मई : होजरी उद्योग से जुड़े मजदूरों के मेहनताना बढ़ाने की मांग को मान लिया गया है। होजरी उद्योग के मजदूर लगभग पिछले एक माह से अपने मेहनतान में बढ़ोतरी को लेकर आन्दोलनरत थे। होजरी उद्योग से जुड़े व्यापारियों ने उन्हें आश्वासन दिया है कि उन्हें नई सिलाई मशीनें खरीदने के लिए सरकार से सहायता दिलाने के प्रयास किए जाएंगे। मेहनताने में बढ़ोत्तरी की मांग को लेेकर शहर के 200 करोड़ रूपए के होजरी उद्योग में लगे करीब 10 हजार मजदूर पिछले एक महीने से कार्य बहिष्कार कर रहे थे। होजरी कंपनी के मालिकों की मानें तो हड़ताल से उद्योग को करोड़ों रूपए का नुकसान हो चुका है। उत्तर प्रदेश होजरी मैन्यूफैक्चर्स एसोसिएशन के संरक्षक और प्रसिद्ध होजरी निर्माता बलराम नरूला ने आज 'भाषाÓ को बताया कि मजदूरों और होजरी उद्योग के मालिकों का समझौता हो चुका है और मजदूर काम पर वापस लौट रहे हैं। उन्होंने बताया कि मजदूरों की मजदूरी में प्रति दर्जन बनियान की सिलाई में तीन रूपए से साढ़े तीन रूपए की बढ़ोत्तरी कर दी गई है। पहले मजदूूरों को प्रति दर्जन बनियान की सिलाई के लिए 26 रुपए मिलते थे जो अब बढ़कर 29 रुपए और 29 रुपए पचास पैसे हो गए है। इसी तरह अंडरवियर की सिलाई, अंडर गारमेंट की सिलाई, कटाई और उनकी पैकिंग तथा प्रेस आदि के लिए भी मजदूरी बढ़ा दी गई है और अब मजदूरों में मंहगाई को लेकर कोई आक्रोश नहीं है।जारी भाषा जफरगौरतलब है कि तमिलनाडु के तिरूपुर और पश्चिम बंगाल के कोलकाता के बाद होजरी अंडर गारमेंट उद्योग में उत्तर प्रदेश के कानपुर का तीसरा स्थान है। यहां होजरी की विभिन्न उत्पादन :बनियान और अंडरवियर बनाने वाली: प्रक्रिया में छोटी बड़ी करीब 500 इकाइयां काम कर रही है, जबकि सिलाई और अन्य छोटे-मोटे कामों के लिए करीब इतने ही लघु उद्योग की इकाइयां अलग है। औद्योगिक शहर कानपुर में 200 करोड़ रुपए का सालाना कारोबार वाली करीब 500 होजरी इकाइयां हैं। भारतीय होजरी मजदूर संघ के महामंत्री मनीराम अग्रवाल कहते हैं कि इस उद्योग में कई स्तर पर मजदूर काम करते है। इसमें सिलाई का काम करने वाले मजदूर, धुलाई का काम करने वाले मजदूर सब अलग अलग होते हैं और इन्हें मजदूरी प्रति पीस के हिसाब से दी जाती है। मजदूरी आदि मिला कर एक मजदूूर औसतन प्रति माह चार से पांच हजार रुपए कमा लेता है। मजदूरों के प्रति पीस हिसाब से मेहनताना हर तीसरे साल बढ़ता है लेकिन इस मंहगाई में इस मजदूरी से खर्चा पूरा नही होता है। होजरी मजदूरों की मांग थी कि उनके मेहनताने में 15 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की जाए। मजदूर अपनी इस मांग को लेकर पिछले करीब एक माह से काम का बहिष्कार कर रहे थे। होजरी मैन्यूफैक्चर्स एसोसिएशन के संरक्षक बलराम नरुला ने कहा कि सूत के दामों में बेतहाशा बढ़ोत्तरी और बिजली की कटौती से होजरी उद्योग वैसे ही संकट में था, अब मजदूरों की हड़ताल से इस उद्योग की और कमर तोड़ दी। उन्होंने कहा कि मजदूूरों की एक अन्य मांग नई मशीनें दिलाने की है। इस बारे में सरकार के प्रतिनिधियों से बात की जाएगी कि मजदूूरों को उन्नत प्रौद्योगिकी की मशीने दिलाई जाएं ताकि वह अपना काम और बेहतर ढंग से कर सकें। नरुला कहते हैं कि पिछले वर्ष दीवाली के समय जो सूत 110 से 120 रुपए प्रति किलो बिक रहा था वह अब 155 से 165 रूपए प्रति किलो मिल रहा है। आश्चर्य की बात तो यह है कि देश में रूई की भरपूर फसल होने व रूई के दामों में अपेक्षाकृत न्यून्तम बढ़ोत्तरी होने के बावजूद सूत के दामों में इतनी अधिक बढ़ोत्तरी कैसे हो रही है। वह कहते है कि मार्च 2010 में सूत के दामों में करीब 11 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई जबकि रूई के दामों में केवल डेढ़ प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। वह कहते हैं कि इसके साथ साथ प्रदेश में बिजली की कमी भी इस उद्योग की बर्बादी का एक बड़ा कारण है। सुचारू रूप से सूत की आपूर्ति न होने से उत्पादन पर असर तो पड़ ही रहा था अब समय पर पर्याप्त बिजली न मिलने से होजरी उद्योग में उत्पादन लागत पहले से बहुत अधिक बढ़ गई है।

पेपर मिल के बर्खास्त मजदूर चिमनी पर चढ़े

स्टार पेपर मिल प्रबंधन ने कर दिया है बर्खास्त
हाथों में मिट्टी तेल की बोतलें लिए दी आत्मदाह की चेतावनी
डीएम, एसएसपी व मिल प्रबंधन के समक्ष हुई वार्ता रही बेनतीजा
सहारनपुर, एजेंसी : नौकरी की बहाली को लेकर स्टार पेपर मिल प्रबंधन के आश्वासनों से आजिज दो मजदूरों ने शनिवार को मिल की चिमनी पर चढ़कर आत्मदाह की धमकी दी। दोनों मजदूर सौ फुट ऊंची चिमनी पर चढ़ गए। दिनभर वार्ता का दौर चला, लेकिन शाम तक बेनतीजा रही। स्टार पेपर मिल परिसर स्थित चिमनी पर सुबह छह बजे मिल प्रबंधन द्वारा बर्खास्त कर दिये गये मजदूर ऋषिपाल व परमहंस मिट्टी तेल की बोतलें लेकर चढ़ गए। इनका कहना था कि यदि आज मिल प्रबंधन ने उनकी बहाली का निर्देश जारी नहीं किया तो वे यहीं आत्मदाह कर लेंगे। यह सूचना जैसे ही आला पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों तक पहुंची तो वहां कई थानों की फोर्स पहुंच गई। अफसरों ने ऊपर चढ़े मजदूरों से फोन पर बात की। मजदूरों ने अपना निर्णय साफ कर दिया और नीचे उतरने से मना कर दिया।मिल प्रबंधन अधिकारी आईजी सिंह व एसबी खुल्लर को बुलाया गया तो कर्मचारियों की उनसे भी नोकझोंक हुई। दोपहर बाद डीएम आलोक कुमार व एसएसपी अमित चंद्रा पहुंचे और मिल प्रबंधन से बातचीत की। सहमति बनी कि कर्मचारियों से बात कर मामले का पटाक्षेप किया जाए। कर्मचारी अनिल वर्मा व शिवनाथ को बुलाया गया और पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों की मध्यस्थता में काफी देर बातचीत हुई, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकल सका। कर्मचारी अनिल वर्मा का कहना था कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला तो आत्मदाह किया जाएगा। उधर, मिल प्रबंधन तंत्र भी कर्मचारियों को वापस लेने के मूड में नहीं दिखाई दे रहा था। समाचार लिखे जाने तक दो कर्मचारी चिमनी पर ही चढ़े हुए थे।

मजदूर और प्रबंधन विवादसहारनपुर : मिल प्रबंधन और मिल कर्मचारियों के बीच विवाद की शुरुआत दीपावली पर हुई। बोनस न देने पर मजदूरों ने सामूहिक छुट्टी ले ली थी। यह बात मिल प्रबंधन को नागवार गुजरी और उसने ऋषिपाल व परमहंस समेत दस कर्मियों को बर्खास्त कर दिया था।















Friday, May 28, 2010

उत्तर प्रदेश की ११ चीनी मिलों निजीकरण के खिलीफ याचिक दायर

नई दिल्ली, 28 मई एजेंसी । सर्वोच्च न्यायालय ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश की 11 चीनी मिलों के निजीकरण के खिलाफ दायर एक याचिका को स्वीकार कर लिया।
प्रदेश की ये 11 चीनी मिलें सरकारी क्षेत्र की कंपनी राज्य चीनी निगम लिमिटेड के अंतर्गत चल रही थीं, लेकिन राज्य सरकार ने इन्हें निजी हाथों में सौंपने का आदेश जारी किया था।
उच्चतम न्यायालय की न्यायाधीश जी. एस. सिंघवी और न्यायाधीश सी. के. प्रसाद की अवकाशकालीन पीठ ने निजीकरण के लिए तीन जून को बोली खोलने पर रोक लगाने से इंकार करते हुए कहा कि इस मामले के अंतिम निर्णय में चीनी मिलों को बेचने के लिए राज्य सरकार द्वारा उठाए गए सभी कदमों पर विचार किया जाएगा।
पत्रकार राजीव कुमार मिश्रा द्वारा दायर की गई इस याचिका में उत्तर प्रदेश चीनी उपक्रम (अधिग्रहण)(संशोधन) अधिनियम 2009 की धारा 3-ए और 3-बी को चुनौती दी गई है। ये धाराएं सरकार और कंपनियों को मिलों में विनिवेश की मंजूरी देती हैं।