Saturday, July 31, 2010

लाल इमली और धारीवाल मिल को मिलेगा जीवनदान

गुरदासपुर, 31 जुलाई
जीवनदान के लिए तरस रही धारीवाल की न्यू इस्टर्न वूलन मिल व लाल इमली कानपुर के लिए बुधवार का दिन शुभ रहा। बोर्ड फॉर दी रिकंस्ट्रक्शन ऑफ दी पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज ने इन मिलों की पुनर्जीवन योजनाको मंजूर कर लिया है। इससे पहले भी दोनों मिलों को जीवनदान मिला था जिससे कोई फायदा नहीं हुआ। अब फिर से दोनों मिलों को जीवनदान मिला है। जानकारी के अनुसार बीआईसी की तरफ से भेजे प्लान में 315 करोड़ रुपये की मांग की गई है। यह राशि कर्ज के जरिए जुटाई जाएगी। प्लान के तहत 100 करोड़ से भी अधिक राशि मिलों की जमीन बेच कर इकट्ठा की जानी थी, लेकिन अब जमीन बेचने की जरूरत नहीं होगी। मिलों के लिए नई मशीनरी खरीदने, नई भर्ती करने के साथ ही कच्चा माल खरीदने के लिए राशि रखी गई है। रिवाइवल प्लान से दोनों मिलों में मौजूद 2500 के करीब स्टाफ को फायदा मिलेगा। सभी स्टाफ को वेतन, पीएफ सहित सभी अदायगी करने की भी बात कही गई है। इतना ही नहीं, वीआरएस की भी व्यवस्था रखी गई है। धारीवाल मिल के करीब 970 मुलाजिमों का, जो वेतन की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे थे, संघर्ष खत्म हो गया। इन मुलाजिमों को कई महीनों से वेतन नहीं मिला था। धारीवाल मिल सहित गुरदासपुर निवासियों के लिए इस रिवाइवल का विशेष महत्त्‍‌व है। इस पिछड़े जिले में बेरोजगारी बहुत ज्यादा है। रिवाइवल में नई भर्ती से क्षेत्रवासियों को काफी फायदा मिलेगा। इस संबंध में धारीवाल मिल के जीएम पीके शर्मा ने बताया कि रिवाइवल प्लान वास्तव में मिल व क्षेत्र के लिए सरसाइवल है। रिवाइवल से क्षेत्र में बेरोजगारी दूर होगी, क्योंकि इसमें नई भर्ती का भी प्रावधान है। मिल में अब ऊनी कपड़ा ही नहीं सूती, फायर प्रूफ व वूलन सिल्क टेक्स्ट फाइबर भी तैयार किया जाएगा, जिसकी मांग बहुत ज्यादा है। कर्जे की वापसी संबंधी पूछे सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि तैयार कपड़ा बेच कर होने वाले मुनाफे से इसे उतार दिया जाएगा। मिल के पास बहुत सारी सरप्लस जमीन पड़ी है। जरूरत पड़ने पर इसे बेच दिया जाएगा।

बांग्लादेशी कपड़ा कामगारों की लड़ाई अब अगले दौर में

मजदूरी 5000 टका करने के लिए उग्र प्रदर्शन
ढाका 31 जुलाई

मजदूरी बढ़ाने की सरकारी पेशकश को खारिज करते हुए बांग्लादेशी कपडा मिलों के हजारों कामगारों ने उग्र प्रदर्शन किया। उन्होंने कारखानों को निशाना बनाया और राजमार्गों पर बैरीकेड खड़ा कर दिया। प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने नए मजदूरी ढांचे का विरोध करते हुए सड़कों पर रैलियां निकाली। कम पारिश्रमिक एवं कमजोर शर्तों के विरोध में कर्मचारियों द्वारा महीनों प्रदर्शन किए जाने के बाद एक दिन पहले सरकार ने नए वेतन ढांचे में 80 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की है। लेकिन कामगारों की मांग 5000 टका किए जाने की थी। नई तनख्वाह 1 नवंबर से लागू की जाएगी। कुछ बड़े यूनियनों ने सरकार की इस वेतन वृद्धि को मानने की बात कही है वहीं कई यूनियनों ने इसे मानने से इनकार कर दिया है।
प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने प्रमुख सड़कों एवं राजमार्गों के रास्ते बंद कर दिए, वाहनों को नुकसान पहुंचाया और कई कपड़ा इकाइयों में तोडफ़ोड़ की। कर्मचारी 5,000 टका मजदूरी तय किए जाने की मांग कर रहे हैं, जबकि सरकार ने कल 3,000 टका मजदूरी की घोषणा की। अभी तक इन कामगारों को 1600 टका पर 12 12 घंटे काम करना पड़ता है।
हालांकि ढाका के पुलिस प्रमुख एकेएम शाहिदुल हक ने धमकी दी है कि 'हम उन्हें ऐसा करने नहीं देंगे.. हमारे पास कड़ा रुख अख्तियार करने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं है। सरकार ने सड़कों पर अपराधरोधी त्वरित कार्य बटालियन की टुकडिय़ां और पुलिस को तैनात कर दिय है।
पुलिस निरीक्षक अब्दुल कैद्दुल ने यहां बताया कि करीब 5000 श्रमिकों ने शहर के मुख्य तेजगांव लिंक रोड को जाम कर दिया और समीप के दर्जनों कपड़ा फैक्ट्रियों पर हमला किया। मंगलवार को सरकार ने कहा था कि वह कपड़ा श्रमिकों की तनख्वाह 1662 टका से बढ़ाकर 3000 टका कर देगी। हालांकि कुछ श्रमिक संघों ने इसे बढ़ाकर 5000 टका करने की मांग की थी।
श्रमिकों ने सबसे ज्यादा गुस्सा गुलशन इलाके में उतारा जहां कई दूतावास एवं विदेशी सहायता संगठनों के कार्यालय हैं।
गुलशन के पुलिस प्रमुख नुरल आलम ने कहा, 'वे फैक्ट्रियों में तोडफ़ोड़ कर रहे थे, कारों को जला रहे थे और सड़कों को जाम कर रहे थे।Ó

दक्षिण भारत के ट्रक ऑपरेटर आज से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर

नमक्कल (तमिलनाडु) 31 जुलाई
दक्षिण भारत के ट्रक ऑपरेटरों ने राजमार्गों पर टोल की दर में कमी की मांग को लेकर रविवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की धमकी दी है। तमिलनाडु लॉरी ओनर्स फेडरेशन के अध्यक्ष के नल्लातंबी ने कहा कि कल आधी रात से तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और पुडुचेरी के लगभग 22 लाख ट्रक सड़कों पर नहीं दिखेंगे।
नल्लातंबी ने कहा कि अगर उनकी मांगों पर सुनवाई नहीं हुई, तो छह अगस्त से देशभर के ट्रक ऑपरेटर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ट्रकों से प्रति किलोमीटर 1.45 रुपए का टोल कर लेती है, जबकि निजी एजेंसियों द्वारा संचालित टोल गेट्स पर टोल टैक्स की दर 3.45 रुपए प्रति किलोमीटर की बैठती है।

ट्रक मालिक छह अगस्त से हड़ताल पर जाने को अड़े
नई दिल्ली, 31 जुलाई
ट्रक आपरेटर छह अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने के फैसले पर अडिग हैं। ट्रक आपरेटरों ने आज कहा कि सरकार टोल टैक्स को कम करने तथा टोल नीति पर फिर से विचार करने की मांग को पूरा करने में विफल रही है। ऐसे में वे छह अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने के अपने फैसले पर अडिग हैं।
अखिल भारतीय मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस :एआईएमटीसी: के अध्यक्ष जी आर षणमुगप्पा ने संवाददाताओं से कहा, ै हमने छह अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का फैसला किया है क्योंकि वाहनों पर लगाए जाने वाले भारी भरकम टोल शुल्क को कम करने की हमारी मांग पर सरकार ने विचार नहीं किया है। करीब 62 लाख ट्रक आपरेटर एआईएमटीसी के सदस्य हैं।
इससे पूर्व सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री कमलनाथ ने कहा था कि सरकार की कोशिश है कि जनता के व्यापक हित में ट्रक मालिक छह अगस्त से हड़ताल पर न जाएं। अनिश्चितकालीन हड़ताल का आह्वान करने वाली एआईएमटीसी की मांग है कि टोल शुल्कों को युक्तिसंगत बनाया जाए। उसने टोल संग्रहण की नीति की उच्चस्तरीय जांच सीबीआई अथवा एक संसदीय पैनल से कराने की मांग की है।

मुंबई में फिर हुई गैस लीक

द्मल्याण में एक कंपनी के क्लोराइड गैस लीक हुई
मुम्बई 31 जुलाई


महाराष्ट्र में ठाणे जिले के कल्याण में एक रसायन कंपनी से गैस लीक होने के बाद कई लोगों ने आज सांस लेने की दिक्कत होने और आंखों में दर्द की शिकायत की। अग्निशमन अधिकारियों ने कहा कि कल्याण में मुरबाद रोड पर कंपनी एएस केमोफार्मा के मुख्य टैंक से क्लोराइड गैस लीक होने के कारण आसपास रहने वाले लोगों को सांस लेने में दिक्कत हुई और आंखों में दर्द हुआ। अधिकारियों के अनुसार कंपनी ने लीकेज को तुरंत बंद किया। किसी को अस्पताल में भर्ती नहीं कराया गया है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्र अधिकारी पीडी जगताप भी कंपनी को बचाने में लगे रहे उन्होंने कहा कि हादसे स्थल का मुआयना करने के बाद कहा कि कंपनी की कोई गलती नहीं है और यह लीकेज अचानक हुई।
हाल में महानगर में गैस लीक की यह दूसरी घटना है। चौदह जुलाई को मुम्बई के सेवरी में बंबई पोर्ट ट्रस्ट के परिसर में रखे सिलेंडर से क्लोरीन गैस लीक होने से 100 से अधिक लोग बीमार पड़ गए थे।

चीन में दोहरे खदान हादसे में 17 लोगों की मौत, 24 फंसे

बीजिंग, 31 जुलाई
चीन में शिनवार को हुए दोहरे खदान हादसे में कम से कम 17 खनिकों की जान चली गई जबकि 24 अभी भी वहां फंसे हुए हैं।
स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि उत्तर चीन के शांशी प्रांत में एक कोयला खदान में हुए एक शक्तिशाली विस्फोट में आज कम से कम 17 खनिकों की मौत हो गई जबकि 20 अन्य घायल हो गए।
शांशी प्रांत के जिस खदान में विस्फोट हुआ उसका मालिकाना हक रखने वाली कंपनी 'यांगछुआन कोल इंडस्ट्री :ग्रुप: कंपनी लिमिटेडÓ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि विस्फोट यिचेंग क्षेत्र के लिनफेन नगर में लियुगोउ कोयला खदान में हुआ और जानमाल की हानि के आंकड़ों में इजाफा हो सकता है।
आज रात हुए एक और खदान हादसे में 24 खनिक बाढ़ प्रभावित हीलोंगजियांग प्रांत के हेंगशान जिले के जिक्सी सिटी में स्थित खदान में फंसे हुए हैं। सरकारी मीडिया में कहा गया है कि उन्हें बचाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
गौरतलब है कि चीन में उचित सुरक्षा उपायों की कमी के कारण होने वाली खदान दुर्घटना में हर साल सैकड़ों लोग अपनी जान गंवाते हैं।
इस बीच, मध्य चीन के हूनान प्रांत की राजधानी चांग्शा सिटी में कल हुए बम विस्फोट में मरने वालों की संख्या बढ़कर चार हो गई है। यह जानकारी पुलिस ने दी।

Wednesday, July 28, 2010

पीथमपुर में ही डंप होगा कारबाइड का 347 मीट्रिक टन कचरा

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर केंद्र सरकार कर चुकी है तय, मानसून सत्र में हुआ खुलासा,
भोपाल कारबाइड में रखा है 347 मीट्रिक टन जहरीला कचरा


भोपाल, 28 जुलाई एजेंसी

आखिर केंद्र के मनसूबे साफ हो ही गए। तीन साल पहले रातों रात भोपाल के यूनियन कारबाइड के हजारों टन जहरीले कचरे को इंदौर के पास स्थित सेज पीथमपुर की एक फैक्ट्री में जला दिया गया। अदालत के फैसला आने के बाद इस मुद्दे के गरम होने के बाद पीथमपुर के आस पास के ग्रामीणों ने जहरीले कचरे के जलाए जाने के बाद भूगर्भ जल के जहरीले होने की बात उठाई और विरोध शुरू हुआ। इसके बाद केंद्र और राज्य सरकार दोनों ही इस बारे में गलत जानकारी देते रहे। हाल ही में केंद्रीय पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश भी उस गांव का दौरा किया था और आश्वासन दिया था कि अब आगे से यहां कचरा नहीं जलाया जाएगा। लेकिन मंगलवार को संसद के मानसून सत्र में केंद्र सरकार अपना मंतव्य साफ कर ही दिया।
भोपाल गैस त्रासदी के बाद से यूनियन कारबाइड के बंद पड़े कारखाने में 347 मीट्रिक टन जहरीला रासायनिक कचरा पड़ा हुआ है, जिसके निष्पादन का निर्णय पीथमपुर स्थित 'ट्रीटमेंट, स्टोरेज एण्ड डिस्पोजल फैसिलिटीÓ (टीएसडीएफ) में किया गया है। यह जानकारी आवास एवं पर्यावरण मंत्री जयंत मलैया ने मंगलवार को राज्य विधानसभा में कांग्रेस की कल्पना परूलेकर के एक लिखित प्रश्न के जवाब में दिया। उन्होंने कहा कि इस कचरे में 96 मीट्रिक टन सेविन एवं नफ्थाल रेसिड्यू, 30 मीट्रिक टन रिएक्टर रेसिड्यू, 56 मीट्रिक टन सेमीप्रोसेस्ड पेस्टीसाइड्स एवं 165 मीट्रिक टन एस्केवेटेड वेस्ट शामिल है।
इसी बीच माकपा ने कहा है कि वह इस सत्र में भोपाल कांड का मुद्दा प्रमुखता से उठाएगी। माकपा नेता सीताराम येचुरी ने कहा, 'डाउू केमिकल्स पर परमाणु कचरा साफ करने की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। अमेरिका के साथ भारत की सामरिक साझेदारी है, ऐसे में उसे राष्ट्रपति बराक ओबामा के उस फैसले से सबक लेना चाहिए, जिसमें ब्रिटिश पेट्रोलियम पर खाड़ी में तेल बहने के मामले में भारी मुआवजा देने के लिए कहा गया था।Ó
आवास एवं पर्यावरण मंत्री ने कहा कि इस कचरे को नष्ट करने के लिए आवास एवं पर्यावरण विभाग ने अलग से कोई नीति तय नहीं की है और किसी कंपनी को इसका ठेका भी नहीं दिया है। यह प्रश्न मूलत: गैस राहत विभाग से संबंधित है, लेकिन विभाग को मिली जानकारी के अनुसार यह कचरा पीथमपुर (धार) स्थित टीएसडीएफ में ले जाने का निर्णय सुप्रीम कोर्ट के आदेश के परिप्रेक्ष्य में लिया गया है।
मलैया ने कहा कि प्रदेश के समूचे खतरनाक कचरे को नष्ट करने के लिए इस एकमात्र टीएसडीएफ का निर्माण राज्य औद्यौगिक विकास निगम, पीथमपुर ऑटो क्लस्टर लिमिटेड एवं मेसर्स रामकी एनवायरो इंजीनियरिंग लिमटेड द्वारा किया गया है।
कल्पना द्वारा यह पूछने पर कि इस कचरे के दुष्प्रभावों को कम करने एवं इसे नष्ट करने के लिए विभाग ने कितनी राशि खर्च की है तथा कचरे से कौन-से प्रभाव मानव शरीर के विरुद्ध राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने चिह्नित किए हैं, आवास एवं पर्यावरण मंत्री ने कहा कि इस बारे में विभाग ने कोई राशि खर्च नहीं की है, इसलिए शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है।

श्रमिकों की खराब स्थिति पर दक्षिणपंथी ट्रेड यूनियन को चिंता !

बीकानेर, 28 जुलाई
भारतीय मजदूर संघ श्रमिकों की खराब स्थिति के कारण राजस्थान में पनप रहे नक्सलवाद एवं माओवाद पर चिंता व्यक्त की है।
भारतीय मजदूर संघ प्रदेश कार्य समिति की बैठक में अखिल भारतीय असंगठित मजदूर संघ के राष्ट्रीय महामंत्री के.लक्ष्मा रेड्डी ने कहा कि नक्सलवाद और माओवाद की जड़ें दिल्ली तक जम चुकी है। देश में श्रमिकों को न्याय नहीं मिल रहा है।
प्रदेश मंत्री गौरीशंकर व्यास ने कहा कि असंगठित मजदूरों को एकजुटता दिखाने की आवश्यकता है। जब तक मजदूर एक नहीं होगा तब तक उसका हक मिलना नामुमकिन है।

हालांकि यह अलग बात है कि देश में मजदूरों की दयनीय हालत के लिए ये ही ट्रेड यूनियनें जिम्मेदार हैं।