Sunday, July 11, 2010

पर्यावरण मंत्री को भी नहीं पता कैसे रातों-रात दफना दिया गया कार्बाइड का कचरा


तारपुरावासियों को डरा रहा है यूनियन कार्बाइड का कचरा
रमेश को घेरा गांववासियों ने, दिखाए जख्म
हर्षवर्धन प्रकाश, इंदौर, 11 जुलाई


मध्यप्रदेश के पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र में करीब 1500 की आबादी वाले एक गुमनाम से गांव तारपुरा के निवासियों को भोपाल गैस त्रासदी के लिए जिम्मेदार यूनियन कार्बाइड फैक्टरी का जहरीला कचरा डरा रहा है। शनिवार को तारपुरा पहुंचे केंद्रीय पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने कहा, 'मुझे पता नहीं है कि पीथमपुर में यूनियन कार्बाइड का कचरा दो साल पहले हड़बड़ी में रातों-रात क्यों दफना दिया गया। मैं भरोसा दिलाता हूं कि आगे ऐसा नहीं होगा।Ó
दिसंबर 1983 में विश्व की भीषणतम औद्योगिक त्रासदी के बाद से बंद पड़े कारखाने के करीब 40 टन ठोस अपशिष्ट को करीब दो साल पहले तारपुरा से करीब 500 मीटर दूर एक घातक कचरा निपटान संयंत्र में गोपनीय ढंग से दफना दिया गया था। गांववासियों की शिकायत है कि इसके बाद नजदीकी जलस्त्रोत प्रदूषित हो गए।
अब यूनियन कार्बाइड के करीब 350 टन जहरीले कचरे को इसी संयंत्र में भस्म करने की योजना कागजों पर है, जिससे आशंकित गांववालों ने सड़क पर उतरकर मोर्चा खोल दिया है।
इंदौर से कोई 30 किलोमीटर दूर तारपुरा में 8 जुलाई को भीड़ ने उन दो वाहनों को रोककर नुकसान पहुंचाया, जो इस संयंत्र में एक टेक्सटाइल फैक्टरी का कचरा ले जा रहे थे।
इसके दो दिन बाद यानी 10 जुलाई को केंद्रीय वन और पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश को गांववालों के जबर्दस्त विरोध का सामना करना पड़ा, जब वह पीथमपुर स्थित घातक अपशिष्ट निपटान संयंत्र का निरीक्षण करने पहुंचे।
तख्तियां थामे गांववालों ने रमेश को घेर लिया और उनसे इस संयंत्र को बंद करने की मांग करने लगे। इनमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी थीं।
नाराज भीड़ के सवालों से घिरे रमेश ने प्रदर्शनकारियों को भरोसा दिलाया कि आबो-हवा और इंसानी आबादी की सुरक्षा सुनिश्चित किए बगैर यूनियन कार्बाइड के कचरे का निपटारा नहीं किया जाएगा। उन्होंने साफ किया कि यूनियन कार्बाइड के कचरे को पीथमपुर के घातक कचरा निपटान संयंत्र में जलाने को लेकर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
बहरहाल, खुद वन और पर्यावरण मंत्री भी मानते हैं कि एक आबाद गांव के पास घातक कचरे का निपटारा करने वाले संयंत्र का संचालन 'चिंता का विषयÓ है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि यूनियन कार्बाइड के कचरे का निपटारा केंद्र और राज्य सरकार के आपसी तालमेल और पारदर्शी ढंग से किया जाएगा। इससे पहले स्थानीय आबादी को भरोसे में लिया जाएगा।

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